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एक व्यक्ति कई पद और संस्था विधि शून्य
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बिलासपुर, 30 जुलाई 2026।
छत्तीसगढ़ डायोसिस अपंजीकृत के कोषाध्यक्ष और छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजूकेशन पंजीकृत के सचिव (जिन्हें धारा 27 नहीं मिली है) नाम जयदीप रॉबिंसन के विरुद्ध जिला न्यायालय बिलासपुर के आदेश पर एक एफआईआर दर्ज हुआ है। इस प्रकरण में आवेदक संजय लूथरा ने जो दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं वे बताते हैं कि जयदीप रॉबिंसन ने अलग-अलग न्यायालय में किस तरह से भिन्न-भिन्न पद नामो से अलग-अलग समय पर आवेदन पत्र प्रस्तुत किया और अलग-अलग पहचान से इकरारनामे किये और शपथ पत्र दिए। जैसे 23 .11 .2017 जयदीप रॉबिंसन विक्रेता और संजय लूथरा क्रेता इकरारनामे में जयदीप रॉबिंसन ने स्वयं को यूनाइटेड क्रिश्चियन मिशन सोसाइटी रजिस्टर्ड 1860 बताया और कहा कि वे पॉवर ऑफ़ अटॉर्नी होल्डर है। फिर 20 .11. 2017 के इकरारनामे में जयदीप रॉबिंसन ने स्वयं को यूसीएमएस का अध्यक्ष बताया और संस्था का पंजीयन क्रमांक 877 बताया यह संस्था बिलासपुर में है।
अतिरिक्त कलेक्टर न्यायालय राजस्व प्रकरण क्रमांक 08अ204/2022-23 मैं स्वयं को यूसीएमएस का पास्टर बताया पर संस्था का पंजीयन क्रमांक नहीं बताया। 18.7.2017 नजूल न्यायालय में शपथ पत्र दिया और स्वयं को यूसीएमएस का पास्टर बताया। राजस्व प्रकरण क्रमांक 49अ6/2023-24 में स्वयं को यूसीएमएस का सचिव बताया। एक ही व्यक्ति यूसीएमएस संस्था दो पंजीयन क्रमांक 1860 और 877 का कभी अध्यक्ष कभी सचिव कभी पास्टर तो कभी पावर ऑफ अटॉर्नी होल्डर बन जाता है और सबसे बड़ी बात भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2013 में ही यूसीएमएस नामक नाम की संस्थाको विधि शून्य घोषित कर रखा है। ऐसे में यह बात स्पष्ट समझ में आती है कि इसी समाज की यह संस्था यूसीएमएस किसी का दैवीय संगठन बन गई और किसी जमाने में इस संस्था के नाम पर दर्ज संपत्तियों को कुछ लोग लूटने के इरादे से समय-समय पर पद नाम गढ़ते रहते हैं।
आश्चर्य की बात यह है कि विभिन्न प्रशासनिक न्यायालय ऐसे लोगों के आवेदन पत्र पर न केवल प्रकरण दर्ज करते हैं और उन पर सुनवाई भी कर लेते हैं।


