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नाबालिक युवती का बलात्कार सरकारी योजनाओं पर लगा रहा है प्रश्न चिन्ह

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री राज्य में 2 वर्ष के दौरान बढ़ रहे बलात्कार के मामलों को लेकर आरोप लगा रहे हैं वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के नेता 2 वर्ष की उपलब्धियों पर मिठाई बांट रहे बिलासपुर में सरकार की 2 वर्ष की उपलब्धि के दिन ही बलात्कार के तीन मामले दर्ज हुए हैं । जिनमें से एक मामला अत्यंत संवेदनशील हो गया है। पीड़िता नाबालिग है और आरोपी पुलिस विभाग के 2 कर्मचारी हैं, जो 112 की ड्यूटी करते थे विभाग के आला अधिकारी ऑफ द रिकॉर्ड बोलते हैं की नाबालिक सेक्स संबंधों की आदि थी। और पैसा लेकर संबंध बनाती थी जो आरोपी हैं उनके बारे में यह कहा जाता है कि पहली बार उन्होंने पैसा दिया इसीलिए सब कुछ ठीक रहा किंतु दूसरी बात पैसा नहीं दिया गया इसलिए मामले की शिकायत हो गई। किंतु इस बात का जवाब कोई नहीं देता कि पुलिस विभाग में कार्यरत सिपाही को क्या यह नहीं पता कि नाबालिग से शारीरिक संबंध बनाना भले ही पैसे का लेनदेन करके बनाया गया हो, उसे अपराध की श्रेणी में ही रखा जाएगा। और दूसरी ओर प्रश्न यह उठता है की युक्ति नाबालिग है और निश्चित ही उसका जन्म 2003 के बाद हुआ है तब अधोसंरचना पर जो खर्च हो रहा था और जिसकी प्रशंसा पूर्व मुख्यमंत्री करते हैं । उस समय क्या इस पीड़िता के परिवार को आर्थिक रूप से समृद्ध होने का कोई मौका नहीं मिला, पिछले 2 वर्षों में जो सरकार है उसका भी नैतिक उत्तरदाई कम नहीं है। छत्तीसगढ़ की नाबालिग युक्तियां पैसे को लेकर सेक्स संबंध कायम कर रही है यह अत्यंत चिंताजनक तथ्य है और इस पर ना तो मानव अधिकार आयोग ना बाल संरक्षण आयोग ना महिला आयोग संज्ञान लेते हैं। राज्य की राजधानी में चार विश्वविद्यालय कार्यरत है जिनके पास करोड़ों का बजट है किंतु एक भी विश्वविद्यालय में ऐसे गंभीर विषय पर कोई शोध प्रबंध नहीं होता जिसमें यह शोध हो जाए कि पिछले 20 वर्षों में नाबालिक युवतियां पैसे को लेकर देह व्यापार क्यों कर रही है क्या सरकारी योजनाएं उन तक पहुंच ही नहीं रही और यदि नहीं पहुंच रही है तो सरकारी योजनाओं का लाभ कौन ले रहा है।