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संचार साथी नहीं यह है गले की फांसी

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बिलासपुर, 3 दिसंबर 2025।
आपके स्मार्टफोन पर एक प्री लोडेड अप साठी के लिए सरकार अड़ी है। ऐसे सारे नियम बिना किसी सार्वजनिक बहस के लिए जा रहे हैं। याद रखें कोविड के समय एक ऐसा ही एप ठुस दिया गया और भक्त थाली, थाली और मोबाइल लाइट जलने बुझाते रहे सरकार ने जब चाहा जहां चाहा हमें कतार में लगा दिया।
साथी ऐप जागरूक तबके में उचित ही बेचैनी पैदा कर रही है। सरकार यदि इस ऐप को अनिवार्य बनाने में सफल हो गई तो भविष्य में डिजिटल आईडी ऐप अनिवार्य बनाने का रास्ता खुल जाएगा। सरकार विशेष कर जैनजी के कॉन्सेप्ट से बेचैन है। चुनाव दर चुनाव जीत रहे प्रधानमंत्री अंदर से घबराए हुए हैं। सबका साथ सबका विकास नहीं जासूसी अब एक साथ सरकार ने और निर्देश दिया है। मैसेंजींग ऐप बगैर सिम कार्ड के नहीं चलेगा यह भी जासूसी का तरीका है। भारत तेजी से प्राइवेसी खो रहा है। उसका फोन अब उसका निजी नहीं है सवाल उठता है कि संविधान पर माथा टेकने वाले प्रधानमंत्री के लिए संविधान प्रदत्त स्वतंत्रता का क्या कोई मोल नहीं है।