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19 स्कूल के अध्यापक और छात्रों का बड़ा अहित

अपने ही अवर सचिव के आदेश को पूरा नहीं किया जिला प्रशासन

24hnbc.com
बिलासपुर, 2 जनवरी 2025। 
छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजुकेशन अपंजीकृत में अवर सचिव का आदेश की 30 दिन में नए चुनाव निर्वाचन अधिकारी करायें का पालन नहीं हो सका। साथ ही 19 स्कूलों पर वेतन का संकट और गहरा गया। अवर सचिव के पूरे आदेश और उसे प्रभाव शून्य करने के लिए जो तरीका रायपुर प्रशासन ने अपनाया उससे न्यूयॉर्क टाइम की रिपोर्ट सच साबित हुई है। विस्तार से समझते हैं सीडीबीई पंजीकृत के इस विवाद को, वैधानिक और अवैज्ञानिक समिति के बीच विवाद चल रहा था मामला पीआईएल के माध्यम से उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ भी गया। पीआईएल निराकरण के बाद रजिस्टर की जांच में सीडीबीई ने आर्थिक अनियमितता रुपए दो करोड़ से अधिक का मामला बाहर आया। अवैधानिक समिति सदस्यों ने कोविड काल का वेतन नहीं दिया साथ ही शिक्षकों का पीएफ रुपए लगभग 90 लाख भी नहीं पटाया। इस बीच में रजिस्टर ने समितियां के झगड़े में वैधानिक समिति शशि वाघे को वैध माना और उन्हें चुनाव करने कहा और अवैधानिक घोषित हुई। समिति के सदस्य अपील में और अवर सचिव ने 1 दिसंबर 2025 को आदेश दिया कि 30 दिन के भीतर जिला कलेक्टर रायपुर द्वारा नियुक्त निर्वाचन अधिकारी चुनाव करायेंगे।
यहीं से मामला पटरी से उतरा चुनाव कैसे कराया जाए के लिए आवश्यक बैठक एसडीएम रायपुर में 27 दिसंबर तारीख रखी सीधा अर्थ था चुनाव कराने के स्थान पर गुप्त एजेंडा लागू करना जो कि सामने आया सालेम की निलंबित प्राचार्य को जॉइनिंग कराई जाए बैठक में सालेम के पूर्व छात्र भी थे सब ने और वैधानिक घोषित समिति के सदस्यों ने एसडीएम को बताया कि उन्हें चुनाव कराने कहा गया है किसी को ज्वाइन करने को नहीं। एसडीएम ने वेतन देयको पर भी हस्ताक्षर नहीं किया जबकि परंपरा अनुसार सीडीबीई के 19 स्कूलों में क्रिसमस पूर्व वेतन देने की परंपरा रही है 30 दिसंबर तक चुनाव अधिसूचना भी जारी नहीं हुई है। 
अब स्थिति यह है कि अवर सचिव का आदेश विधि शून्य हो गया और इसकी अपील या रिवीजन केवल सीएस के समक्ष ही हो सकता है या पूरा मामला रेट के माध्यम से छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय आएगा, पर स्कूलों का सामान्य प्रशासन सैकड़ो छात्र-छात्राओं का भविष्य, पढ़ाई, परीक्षा, प्रैक्टिकल सब पर संकट है। स्कूल वर्तमान में कौन चलाएगा इसलिए हम न्यूयॉर्क टाइम की रिपोर्ट का जिक्र कर रहे हैं कि वह सत्य है। पूरा प्रशासन बेहद सुनियोजित तरीके से सेवा चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में मसीह समाज को बेदखल कर रहे हैं और अप्रत्यक्ष रूप से आरएसएस के अघोषित चेहरे को व्यवस्था में बैठने के लिए पुरजोर दबाव डालता है।