डायोसिस और सीडीबीई का विवाद
अवैध उगाही को सरकार कैसे दे रही वैधता
- By 24hnbc --
- Sunday, 14 Dec, 2025
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बिलासपुर, 15 दिसंबर 2025।
छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजूकेशन पंजीकृत के ऊपर छत्तीसगढ़ डायोसिस अपंजीकृत अपने मतदाता कैसे थोप सकता है। असल में यह प्रश्न छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजूकेशन के नियमावली से उठता है। जब कभी भी कोई समिति पंजीकृत होती है तो उसकी एक नियमावली होती है। रजिस्टर के दफ्तर में दो तरह के नियमावली है। पहला आदर्श नियमावली व दूसरा विशेष नियमावली। आदर्श नियमावली सामान्य रूप से सभी पंजीकृत समितियां अपना आती है और कुछ समिति विशेष अपना स्वयं का नियमावली बनती है।
छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजूकेशन का नियमावली 9 . 1959 महाराष्ट्र नागपुर का कॉपी पेस्ट है और इस नियमावली के अंतर्गत जबलपुर डायोसिस एसपी सिंह ने जबलपुर डायोसिस का पंजीयन कर लिया बाद में 2010 में गलत तरीके से नियमावली पंजीयन के कारण एक अधिकारी बीएस सोलंकी के खिलाफ न केवल एफआईआर हुई जेल भी गए। चर्च जो अपंजीकृत है वे अपने पदाधिकारी को चुनकर एजुकेशन बोर्ड में कैसे भेज सकता है। अपंजीकृत डायोसिस की बिशप पंजीकृत संस्था की पदाधिकारी कैसे हो सकती है वह भी बगैर चुनाव में हिस्सा लिए और दिल्ली में बैठा मॉडरेटर किसी को बोर्ड आफ एजुकेशन में नामित कैसे कर सकता है।
स्कूल में फीस से आई धनराशि को चर्च और डायोसिस कैसे ले सकते हैं यह एक बड़ी आर्थिक अनियमितता है जो करोड़ों में है और छत्तीसगढ़ के 19 स्कूल सीडीबीई, छत्तीसगढ़ डायोसिस इस खेल को मिलकर कर रहे हैं। और अब छत्तीसगढ़ सरकार के नासमझ नौकरशाह इस अवैध काम को वैधता प्रदान कर रहे हैं चुनाव कराकर।


