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विश्वगुरु भारत बदहाल अर्थव्यवस्था बंद होती कंपनियां पासपोर्ट छोड़ते नागरिक

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। ये जो डिजिटल इंडिया है ना उसमें डिजिट महत्वपूर्ण हो सकती है किंतु अपने ही नागरिकों की मौत का हिसाब नहीं रखा जाता फिर चाहे वह मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई हो या किसान आंदोलन के दौरान, हां सत्ताधारी दल के एक एक नेता को नेहरू की गलतियां याद है किस कार सेवक पर कितनी लाठी पड़ी यह याद है । पूर्वोत्तर के राज्यों में घुसपैठियों के आंकड़े याद हैं किंतु अपने ही नागरिकों की मौत के आंकड़े सरकार के पास नहीं है देश में वर्ष 2016 नवंबर माह में नोटबंदी हुई उस साल अर्थात 2016-17 में 97840 नई कंपनियां खुली, 1 28 008 कंपनियां बंद हुई, 2017-18 में 108075 कंपनियां खुली 236262 बंद हुई, 2019 - 20 में 123938 कंपनियां खुली और 143233 बंद हुई याद रखें कि 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू हुआ था तब 2017 से 18 के बीच सर्वाधिक 236000 कंपनियां बंद हुई इन आंकड़ों से सहज अनुमान लगता है कि जिस नोटबंदी और जीएसटी को अर्थव्यवस्था के लिए बेहद उपयोगी तकनीक बताया जा रहा था वह तो पाइजन साबित हुआ। अब इसी सापेक्ष में यह भी देखें कि विश्वगुरु भारत जिसे हमारा नेता विश्व की सबसे बड़ी इकोनामी बना रहा है उसमें कितने नागरिकों ने साल दर साल अपने पासपोर्ट छोड़ दिए 2017 में 133049, 2018 में 134561, 2019 में 144000 सत्रह 2020 में 85248, 2021 में अभी तक 111287 नागरिकों ने भारत के पासपोर्ट छोड़ दिए हैं। एक अनुमान के मुताबिक देश की 1 करोड़ 33 लाख जनसंख्या विदेशों में है आखिर इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने पासपोर्ट छोड़ें और 1 करोड़ लोग से ज्यादा की जनसंख्या विदेशों में हैं अनुमान लगा ले कि जो लोग पासपोर्ट छोड़ रहे हैं उनकी जाति क्या है निश्चित रूप से पासपोर्ट छोड़ देने वालों में बहुसंख्यक हिंदू ज्यादा होंगे यह भी हो सकता है कि यह सब लोग देश की नागरिकता छोड़कर दूसरे देशों में बस कर भारत की मजबूती का गुणगान करेंगे। 2014 के पहले के शासन को कोसेगें और 2014 के बाद की आजादी का यश गान करेंगे एक समय पूरे देश में विशेषकर पूर्वोत्तर में घुसपैठियों पर हाहाकार मचा था केंद्र शासन को एनआरसी कानून बनाने की जल्दबाजी इस तरह थी कि उन्हें लगता था की इस कानून के बनते हैं घुसपैठियों को निकाल कर पहचान कर देश के बाहर कर दिया जाएगा तो भक्तगण याद रखें कि सरकार के खजाने से 16 सौ करोड़ रुपए खर्च हुआ और असम में 1032 संदिग्ध नागरिक पाए गए अब सवाल उठता है कि सशक्त शासन, सशक्त व्यवस्था, देशभक्त नागरिक अधिकारी की नजरों से करोड़ों संदिग्ध घुसपैठियें कहां गायब हो गए यदि वे पूर्वोत्तर में नहीं है तो निश्चित ही मैदानी इलाकों में आ गए होंगे भक्तों को चाहिए कि करोड़ों की संख्या में फैले हुए घुसपैठियों को ढूंढा जाए और केंद्र सरकार के सामने खड़ा किया जाए अन्यथा आने वाले समय में आईपीसी की धारा 124 ए के तहत कितने सारे मामले बढ़ जाएंगे कुल मिलाकर महंगाई का झटका महीने में चार बार लगता है किंतु नागरिक ऐसा देशभक्त है कि उसे महंगाई फूल के समान लगती है क्योंकि जीएसटी के मार्फत उसे राष्ट्र विकास में और ज्यादा योगदान का मौका मिलता है अब तो कुछ भक्त राष्ट्रीय विकास के लिए अभिनव योजना भी बना रहे हैं वह स्वेच्छा से आम नागरिकों की अपेक्षा ज्यादा दर पर गैस सिलेंडर और पेट्रोल क्रय करने की योजना बना रहे हैं। 

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