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इतिहास की अनोखी खोज ब्राह्मण हुए बाहरी

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में एक नए इतिहासकार आदरणीय नंदकुमार बघेल जी ने तमाम देसी-विदेशी इतिहासकारों तथा मानवशास्त्रीयों विशेषज्ञों को किनारा करते हुए एक नए एतिहासिक तथ्य को लखनऊ में उजागर किया । और कहा कि ब्राह्मण बाहरी हैं और वह शीघ्र ही सुधर जाएं अन्यथा उन्हें बोल्गा के माध्यम से वापस भेज दिया जाएगा। हम इस चक्कर में नहीं पड़ते कि ब्राह्मण श्रेष्ठ है या नहीं ऐसा कुछ सोचा जाना जाति भेद, नस्लभेद के भीतर आता है। किंतु विचारणीय तथ्य यह है कि ब्राह्मण जो स्वयं को आर्य और आर्यव्रत से आया बताते हैं वे बाहरी कैसे हो गये। सनातन परंपरा में चार वेदों की बात कही गई है जिसमें से ऋग्वेद के अनुसार आर्य सप्तसिन्धु, सीमांत उत्तर भारत, पंजाब, बिहार के निवासी हैं। ऐसे में इतिहास विद नंद जी के लिए बेचारे ब्राह्मण बाहरी कैसे हो गए अगर उनकी चले तो सबसे पहले कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष को बोल्गा नदी का रास्ता पकड़ना पड़ेगा आश्चर्य तो यह लगता है कि एक तरफ नंद जी ब्राह्मण को बाहरी बता कर वोट हमारा राज हमारा तुम सुधर जाओ की बात करते हैं और 2001-2003 में इन्हीं नंद जी को रावण कुमार के बार-बार वध पर बड़ी चिंता लगती थी जबकि सनातन इतिहास के अनुसार त्रेता युग का सबसे हिन प्राणी रावण ही था भले ही उसे कुछ स्थानों पर ब्राह्मण बताया जाता है । किंतु आदतों के अनुसार वह दैत्य प्रजाति का था हां यह सत्य है कि महर्षि कश्यप की पत्नी अदिति से ही देव और दिती थे दैत्य की कहानी पुराणों में मिलती है साथ ही यह भी उल्लेख मिलता है कि लंका का मालिक रावण नहीं था और विष्णु पुराण के अनुसार लंका का निर्माण शिव जी ने कराया था और शिव जी से लंका को रावण ने ब्राह्मण का रूप रखकर छल पूर्वक भिक्षा में लिया था इससे यह सिद्ध होता है कि रावण को जब कभी भी छल करना होता था तो वह ब्राह्मण का वेश रख लेता था ऐसे में त्रेता युग के सब ऐसे हीन प्राणी को यदि विष्णु के अवतरित रूप राम से मृत्यु प्राप्त हुई तो यह सनातन परंपरा का बड़ा न्याय हैं। ऐसे में रावण कुमार को मत मारो का कोई अर्थ नहीं रहता। रही बात उत्तर प्रदेश में नंदकुमार जी के बयान की तो यह पूरा मामला राजनीति से ओतपोत नजर आता है । नंद जी उत्तर प्रदेश यात्रा करते हैं उसी हफ्ते में छत्तीसगढ़ के सीएम की एक पत्रकार वार्ता उत्तर प्रदेश में होती है और नंद जी की गिरफ्तारी से लेकर जमानत तक छत्तीसगढ़ में होती है इसी बीच एक अन्य खबर कश्मीर से आती है अध्यक्ष वैष्णो देवी के दर्शन पश्चात लौटते वक्त छत्तीसगढ़ के किसान से भेट कर लेते हैं। और यह पूरा समाचार छत्तीसगढ़ के अखबारों में प्रायोजित फीचर के समान चल रहा है आखिरकार आम नागरिक इस सब को मिलाजुला कर राजनीतिक नजरिए से क्यों ना देखें और क्यों ना समझे। 

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