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शाह बतौर गृह मंत्री

24HNBC उफ! कैसी यह हिंदूशाही?-3: गजब है अमित शाह का गृहमंत्रित्व! कभी सुना करते थे दाऊद इब्राहिम मुंबई के धन्ना सेठों को डराता है, पैसा वसूलता है! और अब? गृह मंत्री अमित शाह के भारत शासन में? पुलिस हवलदार, सब-इंस्पेक्टर याकि भारत की पुलिस इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस मुल्ला के उस कथन को सही साबित करते हुए है कि देश में यदि अपराधियों का कोई संगठित गिरोह है तो वह पुलिस है। मैं कतई अंबानी समर्थक नहीं हूं। उलटे मैं भारत की बरबादी के कारणों में एक भ्रष्ट क्रोनीवाद के पर्याय अंबानी, अदानी को मानता हूं और इस पर लिखता रहा हूं। बावजूद इसके यह चर्चा झनझना देने वाली है कि भारत सेठ अंबानी से रंगदारी वसूलने के लिए पुलिसजनों ने साजिश रची!सोचें नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खास देश के नंबर एक सेठ और वह भी गुजराती और उस पर खाकी वर्दी की ऐसी नजर! उसे डराने के लिए विस्फोटक छड़ियों सहित मूवमेंट, साजिश की किस्सागोई! आप पूछ सकते हैं भला इसमें अमित शाह और मोदी की हिंदूशाही का क्या मतलब?  है और जबरदस्त है! इसलिए कि भारत जो देश है वह दिल्ली तख्त के मिजाज से धड़कता है। यदि लाल किले के बादशाह का चांदनी चौक के कोतवाल से बेजा उपयोग है तो पुणे का घासीराम कोतवाल भी मनमानी करता हुआ होगा। देश का हर कोतवाल स्वंयभू सत्ता बना जनता को, धनपतियों को, कोठों को, नर्तकियों को नचवाएगा। यह भारत का इतिहासजन्य डीएनए है। इसे और समझना है तो गौर करें कि मुंबई का बॉलीवुड फिलहाल मोदीशाही के आगे कैसा नाचता हुआ है? क्या बॉलीवुड वैसा है, क्या मुंबई के धनपति वैसी आजादी में या वैसी आबोहवा में जीते हुए हैं, जैसे मनमोहन सरकार के वक्त में थे? क्या बॉलीवुड का ग्लैमर नरेंद्र मोदी के आगे लेटता, नाचता, ता-ता थैया करता हुआ नहीं है? वे उद्धव ठाकरे की सरकार से डरते हुए हैं या मोदी सरकार से?तभी हमेशा नोट रखें कि दिल्ली तख्त के राजा के चाल, चेहरे, चरित्र और उसकी राजशाही के व्यवहार में भारत की हर संस्था, हर पुलिस फोर्स, सीबीआई, ईडी, आय कर याकि भारत राष्ट्र-राज्य का लाठीतंत्र संचालित है, प्रेरणा पाता है, उससे गाइडेड है।मतलब प्रदेश के मुख्यमंत्री, गृह मंत्री भी दिल्ली की सत्ता के चरित्र के अनुगामी हैं। यों भी आजाद भारत के (और गुलामी काल में भी) हर सत्तावान की कोतवाल, पुलिस, डंडे के बल से पैसे की तलब पूरी होती रही है। अपनी पुरानी थीसिस है कि भारत लूटने के लिए है और कमाल है जो लोग नादिरशाह से लेकर आज तक लूटते आ रहे हैं फिर भी विद्रोह, क्रांति नहीं सुलगती। गुलामी ने और लूट के अनुभव ने हिंदू को इतना मंदकुंद, कायर व भगवान भरोसे बना दिया है कि मुंबई में, पूरे देश ने इस चर्चा को सामान्य माना कि खाकी गैंग की हिमाकत जो अंबानी से रंगदारी! बात रूटिन में आई-गई हो रही है। दिमाग का यह विस्तार ही नहीं कि मोदी के राज में ऐसा अंबानी के साथ है तो आम जीवन के साथ क्या?जब अमित शाह ने गृह मंत्रालय संभाला था तो मैंने उम्मीद में लिखा था कि पूर्ववर्ती गृह मंत्री जो नहीं कर पाए वह शायद अमित शाह से हो। यदि उनके गृह मंत्री बनने के बाद भी भारत के नागरिक का कोतवाली, खाकी वर्दी का अनुभव नहीं बदला तो कुछ नहीं बदला। मेरी इस सदिच्छा के पीछे नरेंद्र मोदी और अमित शाह का खुद का अनुभव बोलता हुआ था। तथ्य है कि मोदी-शाह स्वंय पुलिस का कटु अनुभव लिए हुए हैं। आईएएस और आईपीएस जमात के प्रदीप शर्मा और संजीव भट्ट यदि आज भी गुजरात की जेल में हैं तो इससे भी मोदी-शाह का अनुभव झलकता है। बावजूद इसके हिंदूशाही के सात सालों में सब उलटा हुआ। आईएएस मंत्री बने हुए हैं और पुलिस अंबानी से रंगदारी की हिम्मत लिए हुए!हां, दिल्ली तख्त के राजाधिराज में नवरत्न मंत्री आईएएस-आईएफएस अफसरान हैं और पुलिस, जांच एजेंसियों से भारत खौफ व रंगदारी का कुंआ बना है। अंबानी प्रकरण आईसबर्ग के टॉप की नुकीली चोटी है। नीचे, सतह के भीतर, पानी के अंदर एजेंसियों ने वह गदर मचाई हुई है, जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती। कल ही मुझे एक भुक्तभोगी सेठ ने बताया कि मोदी ने बजट में घोषणा कराई कि एक अप्रैल से आय कर विभाग केवल तीन साल का पुराना रिकार्ड तलब करने का अधिकार लिए हुए होगा। मतलब पहले पांच-छह-दस साल के रिकार्ड के नोटिस भेज कर अधिकारियों की जो अंधेरगर्दी थी वह खत्म। मगर वह बजट घोषणा एक, अप्रैल से लागू होती उससे पहले 31 मार्च खत्म होते-होते अधिकारी पांच-छह साल पुराने रिकार्ड के हवाले धड़ाधड़ नोटिस जारी कर रहे हैं ताकि सेठ लोग एक अप्रैल बाद चक्कर लगाते रहें। सेठों से नजराना, शुक्रराना पाते रहे।क्या यह मोदी-शाह को पता है? क्या पहले ऐसा नहीं होता था? हां, होता था लेकिन तब और अब का फर्क यह है कि पहले पुलिस और एजेंसियां न्याय, जवाबदेही याकि संविधानसम्मत व्यवस्था में सर्वजनीय, समान सोच लिए हुए थीं। जबकि अब राजा की निजी फौज में बदली  हुई हैं। पुलिस, सीबीआई, ईडी जैसी तमाम एजेंसियों को लेकर आज क्या धारणा है, इनसे क्या काम होता हुआ है? जवाब है डराने, बदला लेने, अनाचार और भेदभाव का काम। हिंदूशाही ने भारत को लड़ाई का स्थायी पानीपत मैदान बना डाला है। इसलिए पुलिसआय कर, सीबीआई, ईडी आदि् तमाम संस्थाएं अब हिंदूशाही के तीर-भाले की तरह हैं। कर्मचारी, अफसरों को इन तीर-भालों से आंतक बनाने, डराने-मारने, लूटने, बदला लेने के खून का नया स्वाद लगा है तो दिल्ली पुलिस का कमिशनर इस मुगालते में जीता है कि कौन होती है अमेरिका की रिहाना, स्वीडन की ग्रेटा, बेंगलुरू की दिशा रवि! मैं इनको ईमेल, टूल किट से नानी याद करा सकता हूं। ऐसे ही मुंबई के कमिश्नर के लिए अंबानी हों या अरनब या रिया चक्रवर्ती सब वे मुर्गियां, जिन्हें डरा कर, हलाल कर मालिक को खुश करो, नाम कमाओ और उसकी आड़ में मनाचाहा करो।पहले पुलिस, हाकिमशाही सभी नागरिकों को समान भाव एक तराजू में तौलते हुए थी। अब वह मुसलमान को अलग निगाह से देखती है। भक्तों-आलोचकों को अलग-अलग तरह से देखती है। यदि मुसलमान जेल में डाला जाता है तो हिंदूशाही का शंख बजेगा देशद्रोही जेल में! ऐसे ही दिशा रवि अंतरराष्ट्रीय साजिशकर्ता, रिया चक्रवर्ती ड्रग्स सिंडिकेट चलाते हुए और शाबाश पुलिस जो अपराधी को एनकाउंटर में मार डाला!कहने को नरेंद्र मोदी ने संसद में कहा है कि सब कुछ बाबू (आईएएस) करेंगें क्या? आईएएस बन गया तो फर्टिलाइजर की फैक्टरी चलाएगा, केमिकल फैक्टरी भी चलाएगा, हवाई जहाज भी चलाएगा, बाबुओं के हाथ में देश दे कर हम क्या करना चाहते हैं? ये अमृत वचन मोदी ने संसद में बोले। लेकिन हकीकत उलटी। मोदी कैबिनेट में सर्वाधिक ताकतवर बाबू मंत्री ही हैं! उनकी सरकार और तमाम भाजपाई मुख्यमंत्री अफसरों से संचालित हैं। कुछ ही दिन पहले उत्तराखंड में मुख्यमंत्री को बदलना इसलिए पड़ा क्योंकि अफसरशाही से त्रस्त विधायक बगावती हो बैठे थे। तभी कोई माने या न माने लेकिन तथ्य है कि आजाद भारत के इतिहास में बाबुओंपुलिसजनों, डंडाधारी एजेंसियों पर दिल्ली दरबार की आज जैसी निर्भरता पहले कभी नहीं थी। जनप्रतिनिधि आउट हैं और जनता या तो भक्त या दुश्मनऐसी आबोहवा में अफसर-पुलिस की चांदी अनिवार्यत होगी और  वह दाऊद की जगह लेती बनेगी।इस वास्तविकता का प्रतीक अंबानी प्रकरण है। मुकेश अंबानी को पता है कि भारत के सिस्टम में आईएएस-आईपीएस-रेवेन्यू याकि तमाम विभागों, एजेंसियों, संस्थाओं की रंगदारी और उनको नजराना, शुक्रराना, हरजाना देने के पैमाने क्या-कैसे रहे हैं। बावजूद इसके मुकेश अंबानी ने कल्पना नहीं की होगी कि मोदी के राज में पुलिस गैंग का आतंक, रंगदारी साजिश उन्हे अपने घर के बाहर ही देखने को मिलेगी। मुकेश अंबानी और उनका परिवार चैन में नहीं जी रहा होगा। मोदी-शाह ने अंबानी की सुरक्षा में केंद्रीय जांच एजेंसी और पुलिस बल भले मुहैया कराया हो लेकिन अंबानी परिवार जानता है कि रहना कोतवाल के इलाके में है। ठाकरे-एनसीपी-कांग्रेस के राज के कोतवालों में जीना है। तभी यदि अंबानी की सुरक्षा के खातिर मोदी सरकार यदि ठाकरे राज को येन-केन-प्रकारेण गिराए तब भी अंबानी बेखौफ नहीं जी सकते। मोदी-शाह जो सोच, जो कर रहे है पुलिसजनों के लेटरबम से जनप्रतितिनिधी सरकार को ध्वस्त करने की की सोच कुल मिलाकर पानीपत की लड़ाई का विस्तार है जिसमें कारिंदों की और बन आएगी, रंगदारी का तानाबाना और बढ़ेगा। मोदी-शाह को अंबानी प्रकरण में समझना यह था कि सचिन वझे और पुलिस कमिश्नर क्या कारिंदों की खुली हिम्मत-हिमाकत की क्या प्रतिनिधि नहीं है? और सिलसिला आगे लगातार बढ़ेगा। आखिर जब सब कुछ दिल्ली तख्त के बादशाह ने अपने हाथों में केंद्रित कर लिया है तो लाल किले से थोड़ी दूर वाला चांदनी चौक का कोतवाल भी स्वंयभू इलाके का राजा होगा तो मुंबई का कमिश्नर अपने महानगर का मालिक और असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वझे अपने इलाके का बादशाह!इस तंत्र में प्रदेश के गृह मंत्री देशमुख का मतलब नहीं है। इसलिए कि वह भी तो पुलिसजन को वैसे ही बोलता हुआ होगा जैसे मोदी-शाह एजेंसियों के अफसरों से बोलते हैं। यही नेतृत्व का, राजा का अफसरशाही के आगे सरेंडर है, उनकी मनमानी बनवाना है। भाजपा ने हल्ला बनाया है कि महाराष्ट्र के गृह मंत्री ने सचिन वझे से सौ करोड़ रुपए की उगाही चाह कुफ्र किया और प्रमाण कमिश्नर का पत्र है तो जरा भाजपा बताए यदि इंस्पेक्टर इतनी ताकत लिए हुए है तो कमिश्नर कितना ताकतवर होगा? कमिश्नर आदर्श है या कलंक जो उसने सचिन वझे से बात सुनी और उसे तुरंत सस्पेंड नहीं किया। न ही गृह मंत्री-मुख्यमंत्री को तब पत्र लिखा। पत्र तब लिखा जब तबादला हुआ और दिल्ली के आकाओं की आड़ बनाने के लिए बतलाया कि उसका इंस्पेक्टर, गृह मंत्री बार-रेस्टोरेंट से रंगदारी की योजना बनाए हुए थे। रंगदारी की वह साजिश नई बात या राष्ट्र सेठ-खरबपति अंबानी से रंगदारी की साजिश विस्फोटक?बहरहालस लेवल कोई हो, पद स्तर भले अलग-अलग हो आम प्रजा, छोटे रेस्टोरेंट मालिक से ले कर खरबपति अंबानी सब बेखौफ हाकिमी की नजर के मारे हैं। तभी सोचिए कि भारत के नंबर एक कुबेरपति को डरा कर उससे रंगदारी वसूलने की साजिश का किस्सा भारत की प्रगति है या यह जंगल, लूट राज की और देश का बढ़ना है? इसके बाद का अगला सवाल है हम सनातनी हिंदू क्या करें? आने वाली पीढ़ियों की चिंता में क्या सोचें? 

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