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जानें व्रत विधि, पूजन का शुभ मुहूर्त और कैसे करें गणपति की स्थापना

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समाचार -
बिलासपुर। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में पूरे भारत में विशेष रूप से महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी के नाम से आयोजित किया जाता है। भगवान गणेश हिंदुओं के आदि देवता हैं और इन्हें विवेक, शक्ति और तर्क का देवता माना जाता है। मूषक इनका वाहन है। गणेश, शंकर, विष्णु, सूर्य और मां भगवती इन पंचदेवों में इन्हें प्रथम स्थान प्राप्त है। ऋद्धि और सिद्धि इनकी दो पत्नियां मानी जाती हैं और इन्हें मोदक यानी लड्डू बहुत प्रिय हैं। ऐसा विश्वास है कि इस दिन भगवान गणेश का विशेष पूजन, अर्चन और स्तवन करने से वे अतिशीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं और उपासक को सब प्रकार की सिद्धियों की प्राप्ति करवाते हैं। मुंबई स्थित सिद्धिविनायक मंदिर में बहुत बड़े कार्यक्रम का आयोजन होता है, जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु वहां पहुंचते हैं और वहां आयोजित विशेष पूजा में सम्मिलित होते हैं। चारों ओर गणपति बप्पा मोरया के जयकारे सुनाई देते हैं। ऐसा विश्वास है कि इस दिन भगवान गणेश के निमित्त व्रत रखने वाले उपासकों पर गणपति जी अपनी विशेष कृपा बरसाते हैं और उन्हें धन धान्य से संपन्न बना देते हैं। आइए, अब आपको बताते हैं कि गणेश चतुर्थी का व्रत कैसे रखा जाता है और क्या है व्रत की विधि।
व्रत की विधि
इस दिन प्रात:काल स्नान आदि से निवृत्त होकर यथाशक्ति चांदी, तांबे, मिट्टी या फिर गोबर से भगवान गणेश की प्रतिमा बनानी चाहिए। इसके बाद नया कलश लेकर इसके मुख पर सफेद या लाल वस्त्र बांधकर उसके ऊपर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए और मंत्रोच्चारण के साथ विधिवत रूप से इनका पूजन और अर्चन करना चाहिए। अंत में लड्डुओं का भोग लगाकर इनकी आरती करके प्रसाद वितरित करना चाहिए। शाम के समय फिर से उनका पूजन करके व 21 लड्डुओं का भोग लगाते हुए यथायोग्य दान आदि कर दक्षिणा के साथ प्रतिमा और कलश आचार्य को समर्पित कर देना चाहिए। पूजा के बाद मुख नीचे करके चंद्रमा को अर्घ्य भी देना चाहिए। अर्घ्य देते समय चंद्रमा को नहीं देखना चाहिए, ऐसा कहा गया है। क्योंकि इस दिन चंद्र दर्शन से कलंकित होना अथवा मिथ्या आरोप लगने का भय होता है।
पूजन का शुभ मुहूर्त
किसी भी पूजन के लिए विशेष समय होता है, जिसे हम शुभ मुहूर्त कहते हैं। ऐसा विश्वास है कि शुभ मुहूर्त में ही अभीष्ट देव का पूजन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। आइए अब आपको बताते हैं आज गणपति पूजन का शुभ मुहूर्त कब है। पूजा एवं गणपति स्‍थापना का शुभ मुहूर्त आज दोपहर 12:17 बजे से रात 10 बजे तक रहेगा। सभी उपासकों को यह समय ध्यान में रखना चाहिए और इसके अनुसार ही गणपतिजी का पूजन और अर्चन करना चाहिए।
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गणपतिजी की स्थापना कैसे करें
गणपतिजी की स्‍थापना करने से पहले सबसे पहले मन में उनका ध्यान करते हुए लकड़ी की चौकी पर गंगा जल छिड़क लें और उसके बाद चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछा लें और उस पर अक्षत छिड़कें। तदनंतर चौकी पर भगवान गणपति जी की मूर्ति को विराजमान करें। विराजित करने के बाद गंगा जल अथवा साफ शुद्ध जल से उन्हें स्नान करवाएं। उन्हें विराजमान करते समय दोनों तरफ रिद्धि और सिद्धि के रूप में एक-एक सुपारी का साबुत दाना भी रखें। गणपतिजी के दाईं तरफ जल का कलश भी रखें। इसके बाद हाथ में अक्षत लेकर गणपतिजी आवाहन करें। इन सब कार्यों को करते समय मन में हमेशा ‘ओं गणपतये नम:’ का जाप भी करते रहें। स्थापना के बाद उन्हें सिंदूर, जनेऊ, केसर, हल्दी, चंदन, मौली, लाल पुष्प, दूर्वा, मोदक, नारियल आदि चढ़ा दें। और उन्हें 21 लड्डूओं का भोग लगाएं और भोग लगाने के बाद उनकी आरती उतारें। आरती के बाद प्रतिमा के पास पांच लड्डू रखकर बाकी 16 लड्डू गरीबों में बांट दें।

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