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उच्च नैतिक आदर्श की बात करने वालों की लंगोट.....

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समाचार -
बिलासपुर, 18 मई 2023। डीआरडीओ वैज्ञानिक प्रदीप कुरूलकर का मामला मीडिया में पत्तलकरो के कारण वैसी जगह नहीं पा रहा है, जैसी उसे मिलनी चाहिए। आखिर स्वामी भक्त अपनी भक्ति में कोई कोर कसर नहीं रखना चाहते, प्रदीप ने स्वयं को लंदन निवासी बताने वाली लड़की को क्या क्या संवेदनशील सूचनाएं दी या नहीं दी वे हनी ट्रैप का शिकार थे या होने की लंगोट इतनी कच्ची थी। असल में आर एस एस के लोग हनी ट्रैप का शिकार होते ही रहते हैं इनमें सूची लंबी है। कौन नहीं जानता आरएसएस से नियुक्त गुजरात के संगठन मंत्री संजय जोशी को पार्टी के ही लोग किस तरह निपटा दिया। मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री राम माधव ऐसे ही कांड के शिकार हुए, आरएसएस के खेमे में दखल रखने वाले कभी मजाक में तो कभी गंभीरता से स्वयं सेवकों के गे होने और स्वयं सेवकों के महिला मित्रों के साथ चटखारे दार संबंधों की कहानियां बखूबी सुनाते बताते हैं। प्रदीप ने अपने इंटरव्यू में स्वयं यह बताया कि वह चार पीढ़ी से आर एस एस के कार्यकर्ता हैं और दो दशक से आरएसएस के कार्यक्रमो में ना केवल साज बजा रहे हैं बल्कि गंभीर विषयों पर आरएसएस के मंच पर भाषण भी दे रहे हैं ऐसे व्यक्ति का मानसिक, शारीरिक चरित्र कितना ऊंचा होना चाहिए यदि नहीं है तो हनी ट्रैप में फसना उचित है। अब सवाल यह उठता है कि कि डीआरडीओ जैसे संवेदनशील स्थान पर कार्यरत वैज्ञानिकों की सत्यनिष्ठा पर क्या सरकार आंख मूंदकर भरोसा करती है। जब देश में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गुप्त रूप से पेगासस खरीदा जा सकता है और अभी एक नया सॉफ्टवेयर और खरीदा जा रहा है तो उसका उपयोग भी ऐसे लोगों पर किया जाए ना की विपक्षी नेताओं पर असल में सरकार संदेह के बीच उन पर थोपती है जिस से उन्हें अपनी सत्ता चले जाने का भय है जो देश की संवेदनशील सूचनाओं को अन्य राष्टो को दे रहे हैं उनकी निगरानी नहीं होती आश्चर्य तब लगता है जब इन्हें पत्तलकार राजनीति का चाणक्य, मास्टर स्ट्रोक जैसे उपाधि देते हैं असल में यह लोग तो अपना मंत्रालय भी ठीक से नहीं संभाल पाते पर इस्तीफा, नैतिक उत्तरदायित्व, शर्म, लोग, लज्जा जैसे शब्द प्रत्यय विशेषण इनकी डायरी में नहीं है।