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प्रवर्तन निदेशालय, आप, कांग्रेस, भाजपा सब बता रहे छत्तीसगढ़ को, पियक्कडो का राज जनता की कौन सुने
- By 24hnbc --
- Monday, 15 May, 2023
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समाचार -
बिलासपुर, 16 मई 2023। यहां सब ईमानदार हैं और सबके जीभा पर सरस्वती विराजमान है क्योंकि पियक्कड़ तो जनता है जो बोल रहा है उसने तो शराब को कभी हाथ नहीं लगाया, हां हाथ में गंगाजल लेकर कुछ वादे जरूर किए । ईडी के जिम्मेदार अधिकारी प्रेस नोट जारी करके छत्तीसगढ़ में भूपेश सरकार के कार्यकाल में 2018 के बाद 2000 करोड़ के स्कैम का खुलासा करते हैं। देश की कट्टर इमानदार राजनीतिक पार्टी के पदाधिकारी छत्तीसगढ़ की सरकार पर 9000 करोड़ का आबकारी घोटाला तैय करते हैं। कहानी यहीं नहीं रुकती कांग्रेस के प्रवक्ता अपने पूर्ववर्ती सरकार पर 4400 करोड़ का आबकारी घोटाला का आरोप लगाते हैं, ये सब लोग घोटाले के जीरो उस कमरे के सामने बयान करते हैं जिसकी कलम सत्ताधीसो के सामने कुछ सौ, हजार और लाख में बनती बिगड़ती किंतु सदा अपनी इज्जत ताक पर रखकर बैठती है तभी तो ऐसे लोग इमला लिख कर चले आते हैं कोई यह नहीं पूछता कि पूरा आबकारी घोटाला या अन्य कोई भी घोटाला वर्ष 2003 के बाद ही क्यों होता है। क्या छत्तीसगढ़ में 2001 से 2003 के बीच हरिश्चंद्र का शासन था क्योंकि 2001 से 2003 के बीच भारतीय जनता पार्टी के द्वारा निकाली गई परिवर्तन यात्रा में तब की जोगी सरकार पर कई घोटाले के आरोप पत्र भाजपा जारी करती थी सत्ता में आने के बाद कहीं भी किसी भी घोटाले में उसने कोई कार्यवाही नहीं की, आज भाजपा के नेताओं को भले ही याद ना हो पर 2003 के बाद उनकी सत्ता का पहला घोटाला आदिवासी को गाय के वचन के साथ शुरू हुआ और प्रदेश भर में हरियाणा, पंजाब से दुधारू गाय लाकर देने की आड़ में करोड़ों रुपए का बंदरबांट हुआ। भाजपा के अन्य चर्चित घोटाले सब इंस्पेक्टर भर्ती, चना घोटाला, धान घोटाला 24000 करोड, नमक घोटाला, गर्भाशय घोटाला, मलेरिया दवा घोटाला, स्वास्थ्य विभाग का कबाड़ गाड़ी घोटाला, जमीनों में भदौरा कांड जैसे अनगिनत छोटे-बड़े घोटाले 15 साल के शासनकाल में लगते रहे। इन सब पर सबसे बड़ा घोटाला जो मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह के अपने दिमाग की उपज रहा जिसमें 1,2 नहीं 3 आईएएस अधिकारी बराबर से जिम्मेदार रहे जिस घोटाले में खुद तो लगे ही लगे साथ में भारत सरकार के रेल मंत्रालय को भी घसीट लिया, नाम था रतनजोत घोटाला। इस घोटाले की लंगोट डॉक्टर साहब अपने साथ लपेट कर घूमते थे उनकी गाड़ी का नाम टाटा सफारी था जिसके बारे में कहा जाता था वह रतनजोत के बायोडीजल से चलती है तभी हम डॉक्टर साहब के घोटाले को लंगोट घोटाला कह रहे हैं क्योंकि डॉक्टर साहब फर्जी रतनजोत, फर्जी बायो डीजल की टंकी पर अपनी अपनी तस्वीर रख कर अपने घोटाले का प्रचार स्वयं करते थे। इतनी कथा वाचन का अर्थ नहीं है यह नहीं है कि भूपेश बघेल सरकार ने कोई घोटाला नहीं किया असल में भूपेश बघेल सरकार ने हर उस घोटाले को जारी रखा जो रमन सिंह करते आ रहे थे जबकि जनता ने उन्हें जो जनादेश दिया था वह रमन सिंह के घोटालों की जांच और दोषियों को सजा के लिए था पर सत्ता में बैठते ही राजा को घोटालों को जारी रखना ज्यादा अच्छा लगा तभी तो टुटेजा, शुक्ला, ढ़ेबर, त्रिपाठी उनके साथ वैसे ही जुड़े रहे जैसे गुड़ के साथ मक्खी चिपकी रहती है। अब सवाल है कि यहां ईमानदार कौन और बेवकूफ कौन तो दूसरे का उत्तर पहले जनता..... जो समझ ही नहीं पा रही कि केवल सत्ता बदल देने से ईमानदारी नहीं आएगी हमको अर्थात जनता को अपने हाथ में हमेशा चाबुक रखना पड़ेगा। अब ईमानदार कौन का जवाब जिसे मौका नहीं मिला वह ईमानदार है। जब तक नहीं मिल रहा तब तक वह इमानदार है। इसलिए केवल बटन दबाकर निश्चिंत न बैठे जब सुबह से रात तक टैक्स देते हैं तो उसका हिसाब भी हम को लेना है।


