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क्या यही है कांग्रेस का आंतरिक लोकतंत्र

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समाचार-
बिलासपुर, 13 मई 2023 । अब तो बिलासपुर कांग्रेस को दोबारा विधानसभा चुनाव में जाने की बारी आ चुकी है। वर्ष 2018 का बिलासपुर विधानसभा चुनाव जीतने के बाद यहां के कांग्रेसी नेता विचार करें वे जनता के हितों के लिए कब मुखर हुए। उन्होंने जब कभी भी मुखरता दिखाई अपने हित के लिए, प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल लगातार बिलासपुर जिले का दौरा कर रहे हैं उनके लिए विधानसभा की वे सीट अत्यंत महत्वपूर्ण है जिन पर प्रचंड लहर होने पर भी कांग्रेस जीती नहीं पर पार्टी नेताओं को अपने मुखिया की मेहनत से क्या लेना देना उनकी लड़ाई तो कार में बैठने जगह मिलने या ना मिलने को लेकर है। याद करें बिलासपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी ने भाजपा के कद्दावर नेता को धूल चटाई इस व्यक्ति को तब नेता बने कुछ दिन ही हुए होंगे और उसे ऐसे कांग्रेसी नेताओं ने राजनीति सिखाना प्रारंभ कर दी जिन्होंने अपने जीवन में चुनाव जीता ही नहीं था कोई उसे धक्का दे रहा था कोई पीछे खींच रहा था तो कोई कुर्सी नहीं देता था कुछ नहीं तो अभद्र भाषा भी बोली और देख लेने की, निपटा देने की धमकी भी दे दी। शुरुआती दिनों में नवनिर्वाचित विधायक ने इन बातों का विरोध किया पर उन्हें शीघ्र ही समझ आ गया कि यह अपनी ऊर्जा नष्ट करना है लिहाजा वे अपने मतदाताओं से जुड़ गए और उन्होंने लंबी राजनीति का रास्ता पकड़ा कुछ नेता अभी भी उसी ऊर्जा नष्ट करने की नीति पर चल रहे हैं और अपनी कार कार में बैठने ना बैठने जगह मिलने ना मिलने को लेकर एक दूजे को औकात दिखा रहे हैं। जनता को वह वीडियो भी याद होंगे जब कांग्रेस संघर्ष कर रही थी और इसे के कुछ नेता थानों के बाहर अपने ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भी अभद्र शब्दों में संबोधित करते दिखाई देते थे। क्या कांग्रेस का आंतरिक लोकतंत्र यही है. ..।