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जिले की दो कुबेर सीट बेलतरा - मस्तूरी

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समाचार -
बिलासपुर, 26 अप्रैल 2023। बिलासपुर जिले के अंतर्गत पिछले 5 साल में दो विधानसभा सीट हाई प्रोफाइल हो गई है एक आरक्षित मस्तूरी और दूसरी बेलतरा, बेलतरा के संदर्भ में तो आजकल एक नारा लोकप्रिय है। बेलतरा की क्या पहचान अवैध प्लाटिंग और मकान जबकि मस्तूरी क्षेत्र में खनिज, कोलवासरी, खनन के लिए जिंदल से अदानी तक उपस्थित है। पूर्व में मस्तूरी की पहचान भदौरा हुआ करता था पर अब वह बीते समय की बात है अब तो यहां के निर्वाचित जनप्रतिनिधि बड़े-बड़े पत्थर खदानों के मालिक हैं। चर्चा पहले बेलतरा की करते हैं। जानकारों का कहना है कि बेलतारा की सीट पर प्रत्याशी चयन को लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए कोई दुविधा नहीं है। जिले में जिस भाजपा विधायक की टिकट पक्की है उसमें पहला नाम बेलतरा के रजनीश सिंह का है। कांग्रेस ने भी अपनी ओबीसी रणनीति को छोड़ बेलतरा में ब्राह्मण प्रत्याशी के लिए मन बनाया दिखाई देने लगा है इसके कई लाभ भी हैं इसके पहले कांग्रेस ने जब कभी भी जिसे भी अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया उसकी जड़ खोदने के लिए आधा दर्जन कांग्रेसी सक्रिय हो जाते हैं कहा जाता है कि अधिकृत प्रत्याशी से ऐसे नेता जहां लंबा माल वसूलते थे के बावजूद पक्ष में काम नहीं करते थे शो इस बार मुखिया ने तोड़ निकाल लिया लगता है। छत्तीसगढ़िया बामन को टिकट दो बिल्हा से काटकर और बिल्हा में दोबारा ओबीसी कार्ड खेल लो। मस्तूरी में टिकट के लिए कांग्रेस के भीतर गजब की प्रतिस्पर्धा है इसे सटीक शब्द गला काट कहा जा सकता है। दीवाल से लेकर कांग्रेस से अधिक प्रचार स्वनाम धन्य नेताओं का है। ऐसे चेहरे उतावले पद में प्रदेश के मुखिया को भी अनदेखा कर अपने प्रचार में जुटे हैं इतना भी नहीं समझ रहे कि बगैर मुखिया के आशीर्वाद टिकट हासिल होगी कैसे.....। जिनके ऊपर कई विधानसभा सीट जिताने की जिम्मेदारी है वे भी टिकट के दावे पर लगे हैं। कांग्रेस के एक नेता जिन्होंने मस्तूरी में अपना कार्यालय भी खोल दिया है, परिवारवाद कि छाप को भूलते हुए टिकट का दावा कर रहे हैं सुनते हैं किसी अन्य जिले से उनकी नजदीकी रिश्तेदार का टिकट पक्का है बताया जाता है कि मन को हर लेने वाले इस नेता के पिताजी भी सांसद थे, माताजी भी सांसद थी, अब बेटा जी विधानसभा का दावा कर रहे हैं तभी तो कांग्रेस का आम कार्यकर्ता नाराज हो जाता है। फिलहाल मस्तूरी में पिछले 2 साल से संगठन की मजबूती के कारण प्रत्याशियों के हौसले बुलंद हैं जहां का संगठन मजबूत होता है वहां पर नेता भी ज्यादा उत्साह दिखाते हैं तभी तो पूर्व विधायक जो भाजपा छोड़ कांग्रेस में आए थे भी टिकट मांग रहे हैं, एक अन्य छाया विधायक टिकट के लाइन में है, बताया जाता है कि जिला पंचायत सदस्य भी टिकट के लाइन में है ठीक भी है ऐसे में चुनाव पूर्व कांग्रेस की टिकट प्रतिस्पर्धा राजनीति के मैदान में आईपीएल से कम नहीं होने वाली।