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कील से कांटा निकालना महंगा पड़ेगा गुजरातियों को
- By 24hnbc --
- Friday, 21 Apr, 2023
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समाचार -
बिलासपुर, 22 अप्रैल 2023। सत्यपाल मलिक भारतीय राजनीति के उन गिने-चुने नामों में बचे हैं जिनका जन्म भारतीय स्वतंत्रता के पूर्व हुआ है। वे अपने छात्र काल में ही आर एस एस के आलोचक रहे आज के अनुरागी टाइप के नेताओं को मलिक की हिस्ट्री जान लेना चाहिए। गोदी मीडिया चाहे भी तो मलिक के इतिहास को नहीं बता सकता स्वामी भक्ति आड़े आ जाएगी। सत्यपाल मलिक भारतीय राजनीति में घाट घाट का पानी पी चुके हैं और अब मोदी को पानी पिला रहे हैं। उनका जंग बागपत में हुआ 46 में जन्मे सत्यपाल मलिक के पिता बुध सिंह स्वतंत्रता सेनानी थे और जब सत्यपाल मलिक की आयु 2 वर्ष थी तभी उनका निधन हो गया। 1967 में मेरठ कॉलेज से स्नातक किया और यही से वकालत की पढ़ाई की 67 में ही है कॉलेज छात्र संघ के अध्यक्ष बन गए उन्हें समाजवादी राजनीति हमेशा रास आई कर्फ्यू का उल्लंघन करके उन्होंने उस समय के बड़े नेता चौधरी चरण सिंह का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया चौधरी चरण सिंह कई सभाओं में सत्यपाल मलिक को अपना राजनीतिक वारिस बताते थे। सत्यपाल मलिक 1974 में ही विधायक बन गए थे उन्होंने कम्युनिस्ट नेता आचार्य दीपंकर को साडे 8 हजार वोट से हराया था। 1975, 25 जून दिल्ली का रामलीला मैदान में जब मोराई जी देसाई, अटल बिहारी वाजपेई की उपस्थिति में सत्यपाल ने अपना भाषण दिया तब उनकी उम्र मात्र 29 साल थी वेयर आर एस एस के इतने आलोचक थे कि अटल बिहारी बाजपेई ने चरण सिंह से कहा सत्यपाल मलिक को पार्टी से बाहर कर दो आर एस एस तुम्हें प्रधानमंत्री बना देगा। आगे चौधरी साहब प्रधानमंत्री तो बने पर वह एक अलग कहानी है लेकिन उन्होंने अटल बिहारी जी के कहने पर सत्यपाल मलिक को पार्टी से निकाल दिया था सत्यपाल मलिक राष्ट्रीय लोक दल में वापस आए 80 में चरण सिंह ने उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया उसी साल राज्यसभा में भी भेजा। 84 में फिर निष्कासित कर दिया 84 में ही सत्यपाल मलिक ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया इस बार वह कांग्रेस के अरुण नेहरू के नजदीक थे और राजीव गांधी ने उन्हें फिर से राज्यसभा भेजा 1996 में सत्यपाल मलिक ने मुलायम सिंह की सपा ज्वाइन कर ली 2004 में भारतीय जनता पार्टी जॉइन की भाजपा ने उन्हें अजीत सिंह खिलाफ बागपत से टिकट दिया पर मलिक हारे अब समझे भारतीय राजनीति के दो धुरंधर नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने मलिक को जम्मू कश्मीर का राज्यपाल तब बनाया जब कश्मीर से धारा 370 हटानी थी, r.s.s. को भी नियंत्रित करना था तब उन्हें एक मजबूत कील मलिक के रूप में दिखाई दी कांटे से कांटा निकालना हमारी राजनीति का पुराना तरीका है पर कभी-कभी यह उसी के पैर में गिरता है जो उसका उपयोग करता है। सत्यपाल मलिक कई प्रधानमंत्रियों के कार्यशैली को जानते थे और विवाह की उनकी जुबा पर भी नहीं नाम में भी है ऐसे में मोदी शाह उनका मनचाहा उपयोग नहीं कर सकते और यह भी ध्यान देने की बात है कि सत्यपाल मलिक की मित्रता भारतीय राजनीति के दिग्गजों के साथ हैं।


