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निर्मला रमण का कथन कितना सच है

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समाचार -
बिलासपुर, 14 अप्रैल 2023। देश के परिधान मंत्री ना तो देश में ना कहीं बाहर पत्रकारों के प्रश्नों का जवाब नहीं देते सीधी सी बात वे पत्रकार वार्ता करते ही नहीं। कभी बाहर की तो प्रायोजित वार्ता करते हैं ऐसे में हमारे देश का कोई केंद्रीय मंत्री बाहर जाए तो उसे प्रश्नों का सामना करना पड़ता है, पर यदि ऐसा हुआ तो अधिकतर वे अपने मंत्रालय से हटकर अन्य पर बोलते हैं यहीं से शुरू होती है गड़बड़ी। केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमन ने हाल ही में वाशिंगटन में जो कहा पहले उसे देखें। 
भारत में मुसलमानों की दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी आबादी है और इसकी संख्या बढ़ती जा रही है। मैं पूछती हूं अगर भारत में ऐसा होता कि उन्हें खतरा होता तो उन्हें की आबादी 47 की तुलना में बढ़ कैसी रही होती, क्या ऐसा माना जाए कि किसी की बढ़ती आबादी उसके खुश होने का लक्षण है। सीतारमण के वक्तव्य को कुछ अन्य तथ्यों से मिला कर देखें। देश में 14 फ़ीसदी आबादी के बावजूद सिविल सेवा में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व 2 से 3 फ़ीसदी है। स्वतंत्र भारत में पहली बार कैबिनेट में इस समुदाय का कोई मंत्री नहीं है भाजपा के 303 लोकसभा और 92 में राज्यसभा सांसदों में एक भी मुसलमान नहीं है। देशभर में भाजपा के 1000 एमएलए हैं पर एक भी मुस्लिम नहीं है। सार्वजनिक जीवन में मुसलमानों की अनुपस्थिति गंभीर संकेत करती है संसद में मुस्लिम प्रतिनिधित्व 2014 के बाद सबसे निचले स्तर पर है। 1980 के चुनाव में चुने गए लोगों में से लगभग 10 फ़ीसदी मुस्लिम थे 2014 में इनकी संख्या 4 फ़ीसदी से कम आ गई जो कि 1952 के बाद सबसे कम है। मुस्लिम समुदाय की आबादी 81 में 6.8 करोड़ थी, 11 में 17.2 करोड हो गई पर उनके प्रतिनिधित्व में कमी आ गई। 80 में 49 से घटकर 14 में 23 रह गई। 2009 में 30 से कम हो गई आबादी को देखते हुए कम से कम 77 सांसद होने चाहिए पर मात्र 23 हैं। इसलिए हमें लगता है की आदरणीय वित्त मंत्री का कथन सत्य पर खरा नहीं उतरता।