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दोस्ती निभाना तो सीखो परिधान मंत्री से....
- By 24hnbc --
- Tuesday, 11 Apr, 2023
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समाचार -
बिलासपुर, 12 अप्रैल 2023। देश के परिधान मंत्री ने दोस्ती के चक्कर में एक बार फिर से देश के रुपए हो गफलत में डाल दिया है इसलिए वे बार-बार बता रहे हैं कि विश्व गुरु का रुपए अब डॉलर को पछाड़ने वाला है जबकि ऐसा कहीं कुछ नहीं है यहां तक कि G7 ने भी रुपए को ट्रेड मे वैसा स्वीकार नहीं किया है जैसा परिधान मंत्री और उसके सहयोगी बताते हैं। असल में पूरा खेल क्रूड आयल से जुड़ा है रूस, यूक्रेन युद्ध के पहले भारत का तेल आयात में रूस की स्थिति सबसे नीचे थी, और उस समय भारत अपने तेल आयात का सबसे बड़ा हिस्सा इराक और सऊदी अरब से लेता था। प्रतिबंधों के बाद कहानी बदली और रूस से भारत ने सर्वाधिक आयात किया अब हमारा तेल आयात इराक और सऊदी अरब दोनों के टोटल से भी ज्यादा रूस से होता है और पूरा खेल इसी में है। इस बीच में क्रूड आयल की कीमते लगातार नीचे गई पर आम जनता को कोई राहत नहीं मिली। असल में पूरा लाभ केवल परिधान मंत्री के एक अन्य मित्र अंबानी जी को हो रहा है क्योंकि रूस से तेल बुलाने का एकमात्र अधिकार उन्हीं की कंपनी को है। भारत अपनी कुल तेल जरूरत का 27% सोवियत संघ से ले रहा है प्रतिदिन 1600000 बैरल क्रूड ऑयल जबकि 21 में 12000000 बैरल कुल आयात था और उस समय भारत के तेल आयात का मात्र 2% सोवियत रूस से था रूस उस समय नौवें नंबर पर था अब नंबर 1 पर है आप कहेंगे इसमें बुराई क्या है। बुराई है अब भारत तेल का यह व्यापार रूबल और रुपए के बीच नहीं कर रहा है सोवियत संघ ने भुगतान तीसरी मुद्रा ड्रेहम में मांगा है। दूसरी तरफ सरकार आपको बताती है कि विश्व गुरु का रुपैया अब सब स्वीकार कर रहे हैं जबकि वास्तविकता ऐसी नहीं है। सुई की नोक बराबर जमीन नहीं देंगे किसने ली है कौन मांग रहा है कौन ऐसी कोशिश कर रहा है का नाम परिधान मंत्री के सहयोगी नहीं लेते ऐसा क्यों..... जबकि गलवान घाटी में जब सैनिकों की शहादत हुई तो उन सैनिकों की झड़प हवा से तो नहीं हुई थी किसी देश के सैनिकों से हुई थी तब ऐसे में नाम लेने से इतना परहेज क्यों पूरा खेल 2011 में ही शुरू हो गया था। परिधान मंत्री कब गुजरात के प्रधान सेवक थे और वे चीन गए थे इस संदर्भ में उन्होंने अपनी यात्रा का महिमा मंडल स्वयं किया था उन्होंने बताया था कि वह चीन में गुजरात के 22 युवकों को जो चीन में हीरा तस्करी के आरोप में बंदी थे को छुड़ाने गए थे। उनकी यात्रा के कुछ ही दिन बाद चीन ने 11 आरोपियों को बरी किया 11 को 1 से कुछ साल की सजा देते हुए छोड़ दिया। यहां याद रखें कि अदानी जी उस समय मूल रूप से हीरा का कारोबार ही करते थे। अब आप जानना चाहेंगे उस समय चीन में भारत का राजदूत कौन था तो उसका नाम एस जयशंकर था जो वर्तमान में हमारा विदेश मंत्री है। इसे 2011 का एहसान चुकाना कहेंगे। अब यह भी समझने की आज के परिधान मंत्री जी ने 2011 में हीरा तस्करों को बचाने गए थे।


