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क्या महंगाई, बेरोजगारी, किसान मुद्दे को उठाकर करोड़ों के साथ सत्ता को घेरना बेहतर रास्ता है, शरद पवार के बयान की अंतरध्वनि को समझें ...... निलेश बिसवास
- By 24hnbc --
- Saturday, 08 Apr, 2023
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समाचार -
बिलासपुर, 9 अप्रैल 2023। पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया का बयान उसके बाद गुलाम नबी आजाद का बयान फिर एनसीपी के शरद पवार का बयान से तमाम मीडिया में यह चिंता होने लगी की विपक्षी एकता में पलीता लग गया है और एनसीपी के साहेब भाजपा के साहेब के साथ जुड़े रहे हैं। छत्तीसगढ़ के मीडिया को भी शरद पवार के बयान की बड़ी चिंता है पर संसद सत्र समाप्त होते ही केंद्र के आईटी डिपार्टमेंट ने आदेश जारी करके मीडिया का जिस तरह गला घोटा है, घोटने की तैयारी कर रहे हैं पर छत्तीसगढ़ प्रदेश के किसी मीडिया संगठन के पदाधिकारियों का ना तो कोई बयान आया ना ही किसी ने किसी राजनीतिक दल के प्रवक्ता से चर्चा की.... शरद पवार भारतीय राजनीति की ऐसी शख्सियत हैं जिनके पास भारत का सबसे कम उम्र सीएम बनने का रिकॉर्ड है। जेपीसी के संदर्भ में उनका पूरा साक्षात्कार विपक्ष को यह इशारा करता है कि अदानी या किसी मजदूर, बेरोजगारी, महंगाई के मुद्दे पर लाखों करोड़ों की भीड़ के साथ घेरा जाये। मीडिया पर घोषित आपातकाल और शेष बच गए डिजिटल मीडिया के धुरंधरों का गला पकड़ने के लिए लाए गए आदेश पर हमने एनसीपी के प्रवक्ता से बात की कारण जिसे से बात की जाए उसकी अपनी शिक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है साथ में छत्तीसगढ़ के पत्रकारों के हित में पत्रकार सुरक्षा कानून पर ये तब से लिख पढ़ रहे हैं। जब इसे कोई गंभीरता से नहीं ले रहा था। एनसीपी के प्रवक्ता निलेश बिसवास ने आईटी के मीडिया संबंधी आदेश पर कहा कि इस आदेश के जारी होने की तारीख बड़ी महत्वपूर्ण है। इस बार वैसे भी दोनों सदनों में व्यवधान और व्यवधान रहा बहुमत वाले सदन में चर्चा ना होना भारतीय लोकतंत्र की ऐतिहासिक सत्य है फिर भी यदि मीडिया के शब्दों को डिलीट करने का आदेश सदन जब चल रहा था कब आता तो कुछ बेहतर विमर्श होता इस आदेश के बाद भारत सरकार के पीआईबी विभाग को इतनी ताकत मिल गई है कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत को एक तरफ रखते हुए किसी भी मीडिया रिपोर्ट को एकतरफा जांच के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाया जा सकता है और जो लोग सरकार का कीर्तन करेंगे, आरती करेंगे, भजन करेंगे उनकी उपस्थिति शानदार तरीके से चलेगी। अपनी पार्टी के सबसे बड़े नेता के वक्तव्य पर उन्होंने कहा कि वे तो देश के 4 सबसे बड़े महत्वपूर्ण बेरोजगारी, महंगाई, किसान और मजदूर पर के पक्ष में लामबंदी की बात कर रहे हैं। जब किसान बिल की बात होगी तब भी यह बात खुलेगी कि आदरणीय मोदी जी किसके कहने पर 3 बिल लेकर आए..... देश में बेरोजगारी किस नीति के कारण बढ़ी और कोविड काल में देश की जीडीपी से 4 गुना तेजी से ग्रोथ जिसकी हुई उसके पूरे उद्योग में कितने कर्मचारी हैं। महंगाई किस आर्थिक नीति से बढी और यह आर्थिक नीति किसने लागू कराई मजदूरों के हित संवर्धन करने वाले दर्जनों कानून किसके इशारे पर समाप्त हुए भारत की आत्मा रेलवे सहित पूरा बंदरगाह व्यवसाय और सामरिक महत्व का बाजार कैसे एक गोद में चला गया उन्होंने कहा कि साक्षात्कार के एक पक्ष को पकड़कर इस बात का अंदाजा लगा लेना कि विपक्षी एकता को खराब किया जा रहा है उचित नहीं है। उन्होंने सबसे ज्यादा चिंता इस आदेश पर प्रकट की जिससे गला दबाया जानने वाला है और जिसका गला दबाने वाला है उन्हें विपक्षी एकता होगी या नहीं की ज्यादा चिंता सता रही है।


