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मजबूत स्थिति से स्वयं को संकट में डालना कांग्रेस से सीखें
- By 24hnbc --
- Friday, 07 Apr, 2023
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समाचार -
बिलासपुर, 8 अप्रैल 2023। अच्छी मजबूत स्थिति से स्वयं को संकट में डालने का हुनर कोई कांग्रेस से सीखें इसका सटीक उदाहरण छत्तीसगढ़ की कांग्रेस है। फिलहाल छत्तीसगढ़ में प्रदेश अध्यक्ष बदलने की चर्चा जोरों पर है। देखे तो इसी चर्चा से समाचार बन रहा है।
एक अध्यक्ष को बदलकर एक नया अध्यक्ष साथ में दो कार्यकारी अध्यक्ष का फॉर्मूला अपनाया जाएगा यही चर्चा है। इसलिए यह फार्मूला अपनाया जाएगा क्योंकि 2018 के चुनाव में इसी फार्मूले पर होने से कांग्रेस को बंपर बहुमत मिला था। शायद कांग्रेस को ऐसा भी लगता हो कि दो कार्यकारी अध्यक्ष रखने से भारतीय जनता पार्टी को दलबदल करने में आसानी होगी और जीत पक्की हो जाएगी। क्योंकि यह तो तथ्य है कि 2018 के विधानसभा चुनाव के वक्त कांग्रेस का एक कार्यकारी दयाल दास उयके कांग्रेस को छोड़ भाजपा में चला गया था कार्यकारी अध्यक्ष का फार्मूला भी नेताओं की पकड़ से नहीं है इसका आधार नेता का वर्ग है वह एससी है एसटी है या ओबीसी छत्तीसगढ़ से प्रकाशित एक नामचीन हिंदी अखबार का दिल्ली डेट लाइन से प्रकाशित समाचार कहता है कि कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष के लिए मस्तूरी विधानसभा जिला बिलासपुर के हारे हुए विधायक दिलीप लहरिया के नाम गंभीरता से चर्चा हो रही है कारण वे एससी वर्ग के हैं। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष जिन्हें हटाया जा रहा है वे एसटी हैं और छत्तीसगढ़ में एसटी एससी का वोट बैंक नाराज ना हो जाए इसलिए दोनों को लेकर चलना है। ओबीसी से तो मुख्यमंत्री है ही और प्रतिस्पर्धी भाजपा भी ओबीसी वर्ग से ही प्रदेश अध्यक्ष बनाई है इतना ही नहीं उन्होंने तो नेता प्रतिपक्ष भी इसी वर्ग को दे रखा है। अतः कांग्रेस भी वैसे ही फार्मूला चलेगी जब चुनाव के 7 माह से इस हैं तब प्रदेश अध्यक्ष बदलने की इच्छा इसलिए बलवती हो रही है कि वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष ने विधानसभा में कुछ सक्रियता दिखा दी थी अन्यथा एक समय था जब यही प्रदेश अध्यक्ष प्रदेश के मुखिया के आंख के तारे थे वैसे भी उनका नाम तो मोहन हैं उन्हें तो सबका मनमोहिनी वाला होना चाहिए बहरहाल चर्चा कार्यकारी अध्यक्ष की है। 2018 के पहले के चुनाव में हिम्मत दूरी सीट कांग्रेस ने जीती थी और उस सीट में कांग्रेस के प्रत्याशी से ज्यादा करिश्मा छत्तीसगढ़ के उस समय के स्टार नेता अजीत जोगी का था और दिलीप लहरिया रिकॉर्ड मतों से जीता था बाद की कहानी और भी दिलचस्प है। अजीत जोगी ने अपना राजनीतिक दल बनाया तब दिलीप लहरिया किंतु परंतु करते हुए कांग्रेस के पास रुक गए और अजीत जोगी ने समझौते के तहत मस्तूरी से बहुजन पार्टी को दें दी कांग्रेस ने दिलीप लहरिया को ही अपनी टिकट दी परिणाम कांग्रेस का प्रत्याशी तीसरे नंबर पर आया और बड़ा मैजिक कुछ ही महीने बाद जब लोकसभा चुनाव हुआ तो लोकसभा बिलासपुर से कांग्रेस के उम्मीदवार चुनाव हारे पर एकमात्र मस्तूरी विधानसभा में वे जीते इसे क्या कहेंगे खैर कांग्रेस में हारे हुए प्रत्याशी को संगठन में बड़ा पद देने की परंपरा है। उन्हें भी प्रदेश कांग्रेस में बड़ा पद मिला बिलासपुर से एक और हारी हुई महिला नेत्री को प्रदेश संगठन में बड़ा पद मिला ऐसे में यदि हारे हुए तीन नंबर पर आए हुए छाया विधायक को कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया जाए तो अचंभा नहीं होगा ऐसा करके मस्तूरी के संभावित प्रत्याशियों को भी एक प्रतिस्पर्धी कम होने की खुशी भी होगी और बिलासपुर में जब कांग्रेस की सीट निकालने में पसीना आने वाला है। दिलीप लहरिया पार्टी के भीतर जोश भर देंगे उनके कार्यकारी अध्यक्ष बन जाने से केवल आरक्षित सीट पर ही नहीं पूरे जिले में नाराज एससी वर्ग कांग्रेस के पक्ष में खड़ा होने लगेगा तब तखतपुर में भी कांग्रेसी रिपीट हो जाएगी, बेलतरा भी जीतेगी, बिल्हा भी जीतेगी और कोटा जो कांग्रेस का परंपरागत गढ़ है भी कांग्रेस फतेह कर लेगी। इसलिए हम कहते हैं मजबूत स्थिति में स्वयं को संकट में डाल ना कोई कांग्रेस से सीखें।


