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झोले में भरा है 10306 विलफुल डिफॉल्टर का पैसा अब उठाकर निकलना चाहते हैं बाहर

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समाचार -
बिलासपुर, 25 मार्च 2023। देश की अर्थव्यवस्था को 782 घोटालेबाजों ने बर्बाद कर रखा है। और इन घोटालेबाजों का कर्जा जो लगभग 10 लाख हजार करोड़ है को, पिछले 5 साल में वर्तमान सरकार ने बट्टे खाते में डाला। यदि जेपीसी होती और मामला अदानी से आगे बढ़ते हुए इस सूची पर पहुंचे तो सरकार ही मुद्दा बन जाती। अब यह मामला सदन के स्थान पर सड़क का पद चर्चा का विषय बनेगा। 782 बड़े विलफुल डिफॉल्टर पर चर्चा करना कठिन है वैसे तो विलफुल डिफॉल्टर की सूची 10306 है पर 10 प्रमुख विलफुल डिफॉल्टर की सूची और उनकी रकम जो उन्होंने बैंकों से कर्जा प्राप्त की और नहीं चुकाए समझ आ जाता है कि इस देश के निजाम ने आम जनता की बजाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पहला नाम डीएचएलएफ 34 हजार करोड़, एबीजी शिपयार्ड ऋषि अग्रवाल 22800 करोड़, ईस्टर्न बायोटेक 16000 करोड़, डीपीआईएल भटनागर बंधु 2953 करोड़, रोटोमैक्स कोठारी 14000 करोड, वीडियोकॉन 3250 करोड़, किंगफिशर 9900 करोड़, आईपीएल ललित मोदी 1700 करोड़, गीतांजलि नीरव मोदी 3950 करोड़, गीतांजलि मेहुल चोकसी 13,500 करोड़, आर ए आई एग्री संजीव झुनझुनवाला 4314 करोड़, विल्सन डायमंड 4076 करोड, कोस्टल प्रोजेक्ट्स 23000 करोड़, नॉन कॉस्ट स्टील 4107 करोड़, विंसन डायमंड 2671 करोड़। क्या इन सब लोगों का बड़ा-बड़ा कर्जा देखकर और इसे बट्टे खाते में डालना देखकर आम जनता चुप बैठ सकती है उसे अपने हिंदुत्ववादी नायक पर कोई खिज नहीं आएगी और यही कारण है कि मुडानी अपने को मुद्दा बनते नहीं देखना चाहते व्यक्तिगत घोटालों के अलावा देश में इन घोटालों के कारण 164 योजनाएं ठप है इनके अतिरिक्त कुछ और भावनात्मक घोटाले नमामि गंगे, स्वच्छ भारत, राफेल स्केम, नोटबंदी स्केम, एनपीएस स्केम, चुनावी बांड स्केम, सेंट्रल विस्टा स्केम, पीएम केयर प्राइवेट धंधा स्केम के साथ जब दुनिया में पेट्रोल और डीजल सबसे सस्ते दाम पर है सरकार हर साल 7 से 8 लाख करोड़ का टैक्स जनता से वसूले रही है। इस सब पर संसद में कोई मुंह में खोलें उससे बेहतर है उसकी सदस्यता खाओ और उसे बाहर का रास्ता दिखाओ।