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आप पार्टी छत्तीसगढ़ छोड़ राजस्थान, मध्यप्रदेश के लिए दिख रही संजीदा

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समाचार -
बिलासपुर, 15 मार्च 2023। विधानसभा के तीन महत्वपूर्ण चुनाव 7 माह के बाद होने वाले हैं यह तीनों चुनाव हिंदी पट्टी के हैं। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जिसमें से दो जगह कांग्रेस की सरकार है और तीसरी जगह मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। आप पार्टी की नई नीति जैसी दिखाई पड़ रही है के अनुसार अब उनकी चाल मध्यप्रदेश और राजस्थान पर केंद्रित हो रही है। छत्तीसगढ़ को दिखावे के लिए रखा जा रहा है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं कि दिल्ली और पंजाब के आप पार्टी के मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में और राजस्थान में जिस तरीके से उपस्थिति दर्ज कराई और अपना संगठन खड़ा करा पैसा खर्च हो रहा है यह लगता है कि वह विधानसभा चुनाव को लेकर गंभीर हैं जबकि छत्तीसगढ़ में इसी महीने के 5 तारीख को दोनों मुख्यमंत्री आम सभा किए थे पर संगठनात्मक दृष्टि से छत्तीसगढ़ में आप पार्टी अब लगातार हाशिए पर जा रही है वैसे भी छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी को जिस तरह धूल चटाई और 90 विधानसभा वाली सीट पर भाजपा 14 पर ही ठहर गई आप पार्टी के लिए भाजपा को कुछ लाभ दिला पाना संभव नहीं है। उलट स्थिति राजस्थान और मध्य प्रदेश की है राजस्थान में विधानसभा सीट की संख्या 200 है यहां हर 5 साल में सत्ता परिवर्तन की परंपरा है, और भारतीय जनता पार्टी के पास कूल 70 सीट है। स्पष्ट है राजस्थान में भाजपा की स्थिति छत्तीसगढ़ की तुलना में काफी अच्छी है और आप पार्टी जैसा कि अब तक बीजेपी की बी टीम बंद कर कांग्रेस को नुकसान पहुंचाती है से फिर लगता है कि राजस्थान में यदि वे कांग्रेस को 20 स्थानों पर भी नुकसान पहुंचाते हैं तो भाजपा को लाभ देने में सफल हो जाएंगे। यही बात मध्यप्रदेश के संदर्भ में भी कही जा सकती है मध्यप्रदेश में 230 है सब जानते हैं कि कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया को विधायकों सहित तोड़कर मध्यप्रदेश में किस तरह कोविड मे आम नागरिकों की जान को खतरे में डालकर शिवराज सिंह ने अपनी सरकार फिर से बनाई मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सदस्य संख्या 96 है और वह बाय इलेक्शन में भी जीते हैं यहां भाजपा को कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने के लिए किसी ना किसी दोस्त की तलाश है और वह तलाश पूरी करने के लिए झाड़ू तैयार है। अब तक कि आप पार्टी की राजनीति स्पष्ट रूप से भाजपा विरोध के स्थान पर कांग्रेस विरोध कि है और कांग्रेस भी ऐसा कोई मौका हाथ से नहीं जाने देती जब आप पार्टी का कोई मुद्दा हाथ लगे और कांग्रेस के नेता उसे छोड़ दें। छत्तीसगढ़ में पिछले विधानसभा चुनाव के पूर्व भी केजरीवाल आए थे और बड़ी-बड़ी अस्पताल स्कूल की बात कर रहे थे पर बाद में उन्होंने अपने प्रत्याशियों को मझधार में छोड़ दिया था अधिकतर स्थानों पर झाड़ू की जमानत भी जप्त हुई थी इस बार तो चुनाव के पूर्व ही आप के नेता स्वयं ही मैदान छोड़ते नजर आ रहे हैं। बिलासपुर की एक चर्चित महिला नेत्री तो इन दिनों सर्वदलीय हो गई है जिससे उनके अन्य प्रतिद्वंधीयो के चेहरे पर मुस्कान आ गई.... ।