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सड़क सूनी हो जाती है तो संसद आवारा हो जाती है
- By 24hnbc --
- Saturday, 25 Feb, 2023
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समाचार -
बिलासपुर, 26 फरवरी 2023। 24 जनवरी को हिंडरबर्ग रिपोर्ट आई थी अब उसे आए हुए 1 माह हो गया जब यह रिपोर्ट आई थी तभी विशेषज्ञों ने यह कहना शुरू कर दिया था इस रिपोर्ट के चक्कर में केवल अदानी नहीं भारत के सरकारी क्षेत्र के बैंक और एलआईसी भी नपेंगे। क्योंकि बाजार में कोई जांच हो या ना हो रिपोर्ट सच्ची है तो असर दिखाएगी, अब जो जानकारी बाहर आई है उसके मुताबिक एलआईसी को 50000 करोड़ का झटका लग चुका है यदि पूर्व का जमाना होता तो अब तक फाइनेंस मिनिस्टर और एलआईसी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर से कई को हटाया जा चुका होता पर यह तो मित्र काल है। 27 जनवरी को अडानी की कंपनियों में एलआईसी का 42 हजार करोड़ लगा था जिसका वैल्यूएशन अब घटकर 16566 करोड़ से है। ₹8500 करोड़ का नुकसान हो चुका है और यह जारी है। हिंडरबर्ग ने कहा था अडानी के शेयर 85% ओवर वैल्यू है। उस समय वे दूसरे नंबर पर थे अब 33 के बाहर हैं। 1 महीने में 75% नीचे गिरे बाजार बताता है कि इसके बाद तो कंगाली ही आती है अडानी के चक्कर में सरकारी खजाने को 7 दिनों में 5.68 बिलियन डालर का नुकसान हुआ है पर इसकी भी सरकार को चिंता नहीं क्योंकि सरकार का पहला काम तो चुनाव जीतना है और रोज चुनाव जीतना है गवर्नेस तो वे कभी करते ही नहीं। एलआईसी, एसबीआई, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब एंड सिंध बैंक सब का शेयर टूटा। बैंक ऑफ इंडिया का 18%, इंडियन ओवरसीज बैंक 17%, यूनियन बैंक 16.5%, सेंट्रल बैंक 16.45 %, पंजाब एंड सिंध बैंक 15.6%। सरकार को यह सब पता था एक छोटा सा उदाहरण देखिए 23- 24 के बजट में उर्वरक पर सब्सिडी की कटौती 60 हजार करोड़ की हुई है आखिर सब्सिडी का पैसा कहां जा रहा है। 170000 स्कूल में एक टीचर है शेष लोगों को रखने की सरकार में हिम्मत क्यों नहीं है। सीआरपीएफ में 840405 पद खाली हैं क्यों नहीं पड़ती होती। अडानी का मार्केट वैल्यू 12 लाख करोड़ रुपए गिर चुका है एलआईसी 27 जनवरी को मार्केट वैल्यू 56142 करोड रुपए और अभी 33632 करोड रुपए अंतर बड़ा होता जा रहा है मित्र काल है स्खलिफ नैतिकता का दौर है पैसा जनता का निर्णय दिल्ली का या फिर यह जो पैसा लगा है वह जनता का नहीं है किसी और का है या तो ड्रग माफिया का है आतंकवादियों का है या राजनीतिज्ञों का है अन्यथा एलआईसी और बैंक के बोर्ड मेंबर्स ने आज तारीख तक पूछा क्यों नहीं पूछा क्यों नहीं एफपीओ 17 सौ कहां था तो 32 सौ में क्यों लिया । ब्यूरोक्रेट ब्रोकरेट कैसे बन गया । मित्र काल में लोक लाज की बातें बेमानी है।


