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कांग्रेस का रायपुर अधिवेशन क्या उम्मीद करें...... लोकतंत्र प्रेमी जनता

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समाचार -
बिलासपुर, 19 फरवरी 2023। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में देश के सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस का 85 वाँ राष्ट्रीय अधिवेशन होने जा रहा है। 2022 में जब रायपुर में चिंतन शिविर हुआ था और कांग्रेस की हालत चिंताजनक थी उस परिस्थिति से निकल कर अब कांग्रेस उसके दर्जनों नेता असंख्य कार्यकर्ता भारत जोड़ो यात्रा की ऊर्जा से भरे हुए हैं। इस समय कांग्रेस में चिंता नाम का तत्व नहीं है। उलट कांग्रेस के पास इतने मुद्दे हैं कि वह रोज टारगेट पर ट्रिगर दबा कर लक्ष्य भेदी प्रश्न दाग सकती है। वह समय जब देश की सत्ता पर काबीज भाजपा के नेता कांग्रेस मुक्त भारत की घमंडोक्ती करते थे वर्तमान में अपने दामन पर लगे हुए, रोज लग रहे दागों को लेकर चुप होने की हद तक परेशान हैं। बचाओ में उन्हें हिंदू राष्ट्र, रुद्राक्ष वितरण, अर्जी लगाओ जैसे उपाय सूझ रहे हैं। देश की बहुसंख्यक लोकतंत्र प्रेमी जनता को कांग्रेस के रायपुर अधिवेशन से बड़ी उम्मीद है इतना ही नहीं देश के वे उद्योगपति जो बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण चाहते हैं और नौकरशाही का वह वर्ग जो सत्ता के दबाव में काम नहीं करता भी कांग्रेस के इस अधिवेशन से उम्मीद लगा रहे हैं। गार्जियन की रिपोर्ट के बाद अब मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग है जो यह समझ गया है कि उसे प्रायोजित व्हाट्सएप खबरों से जो लोग भ्रमित कर रहे थे उसके पीछे भारत की कौन सी राजनीतिक ताकत थी 1 दिन पूर्व ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा के खिलाफ कांग्रेस को आमंत्रण दिया है और जवाब चाहा है क्या वह जवाब रायपुर से निकलेगा रायपुर अधिवेशन में निश्चित ही कांग्रेस देश की स्थिति को देखते हुए बहुत से प्रस्ताव पास करेगी वह प्रस्ताव आने वाले समय की राजनीति को प्रभावित करने वाले होंगे। यह अधिवेशन इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इसी साल 1-2 नहीं 9 राज्यों में विधानसभा चुनाव है। जिसमें हिंदी पट्टी के 3 राज्य छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान शामिल हैं जिसमें से 2 जगहों पर छत्तीसगढ़ और राजस्थान कांग्रेस के पास है तीसरा मध्य प्रदेश जहां भाजपा ने छल फरेब और धनबल से कांग्रेस की सरकार गिराई इन चुनाव के तुरंत बाद लोकसभा का चुनाव भी है ऐसे में कांग्रेस को दीर्घकालीन और संक्षिप्त शीघ्र नीति पर काम करना पड़ेगा यह जानते हुए कि उसका मुकाबला छल, बल रखने वाली भाजपा के उस नेतृत्व से है जिसे मोदी और शाह चलाते हैं ऐसे में विचारधारा वाली लड़ाई पर चलना निश्चित ही हौसले का काम है।