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कथा जन के लिए हल स्वयं के लिए

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समाचार -
बिलासपुर, 12 फरवरी 2023। पतझड़ के पूर्व भागवत कथाओं का आयोजन आस्था की चासनी में लपेटकर राजनीतिक सत्ता तक पहुंचने का लड्डू छत्तीसगढ़ी ही नहीं पूरे हिंदी पट्टी के भारत में आजमाया हुआ नुस्खा है। बिलासपुर में पिछले विधानसभा चुनाव के समय भी यह हुआ था और अब फिर हो रहा है अंतर इतना है की पिछली बार आयोजक सत्तासीन थे। भाजपा के कद्दावर श्रेणी के नेता थे, मंत्री थे छत्तीसगढ़ में उनकी तूती बोलती थी आबकारी से लेकर जीएसटी और प्रदेश के खजाने की चाबी थी कुल मिलाकर कहें तो भैया का वजन बहुत ज्यादा था। कुछ लोग इन्हें सूमो पहलवान की श्रेणी में भी रखते थे। पर इस बार ऐसा नहीं है, यह भागवत कथा इस बार सत्ता बचाने की नहीं अपनी ही पार्टी में टिकट पाने की है। ऐसा पार्टी के जानकार बताते हैं बीच में जब कथा संबंधी समीक्षा मीटिंग हुई तो कहते हैं कि जिसे जो जिम्मेदारी मिली थी उसे वह निभाने में पूरी तरह खड़ा नहीं था तब नेतृत्व करता ने लगाम को ना केवल खींचा बताते हैं साथ ही अपेक्षित परिणाम न मिलने पर प्यादे बदलने का भी संकेत दिया बताते हैं। भारतीय जनता पार्टी के लिए बिलासपुर बहुत अहमियत रखता है कहते हैं केंद्र बिंदु है। यहां से लहर उठेगी तो दूर तक जाती है, इसलिए भागवत कथा जरूरी है। जानकार यह भी बताते हैं कि भैया के इस कथा आयोजन से आयोजन को कांग्रेस के कुछ उन नेताओं का भी खूब समर्थन हासिल होता है जिन्हें फूल छाप कांग्रेसी की श्रेणी में रखा जाता है। पिछली बार तो जोगी के समर्थकों ने भी भैया के साथ भागवत कथा आयोजन की सेल्फी खूब डाली थी कथा जब जनकल्याण से हटकर स्व के लिए कराई जाती है कहते हैं उसका प्रताप घटकर चौथाई हो जाता है, क्या चौथाई की ताकत से टिकट पाई जा सकती है और यदि ऐसा होता है तो मानना पड़ेगा सेठ का कर्ज दल पर भारी है ।