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सद्भावना का कार्यक्रम शहर में एक नई हवा चलने का संदेश है
- By 24hnbc --
- Monday, 06 Feb, 2023
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समाचार -
बिलासपुर, 6 फरवरी 2023। जब समाज में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सबसे बड़ा संकट हो तब प्रदेश स्तरीय पत्रकार संगठन सद्भावना ने लोकतंत्र में स्वतंत्र मीडिया विषय पर कार्यक्रम किया यह कदम स्वागत योग्य है। पत्रकार संगठनों द्वारा कार्यक्रम कर लेने से ही उसे आधी सफलता मिल जाती है क्योंकि इस पेशे के प्राणी आसानी से एक ही स्थान पर आना पसंद नहीं करते, कारणों पर चर्चा बाद में भी कर ली जाएगी।
फिलहाल मुद्दा सद्भावना के कार्यक्रम का है अभी इसी पर बात करते हैं। लोकतंत्र में सबसे जरूरी तत्व राजनीतिक दल है क्योंकि लोकतंत्र गैर दलीय दोनों संभव नहीं है ऐसे में लोकतंत्र के दूसरे आवश्यक तत्व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जिसमें मीडिया और पत्रकार शामिल है। जब इस बात पर चर्चा करें कि स्वतंत्र मीडिया लोकतंत्र में आवश्यक किस तरह है और उसे काम करने का पूरा स्पेस कैसे मिले और कार्यक्रम में विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी प्रदेश की विपक्षी पार्टी का कोई प्रतिनिधि न आए तो इस के कुछ मायने इस तरह नजर आते हैं। नंबर एक क्या वह राजनीतिक दल मीडिया के लिए इतना खतरनाक है। दूसरा क्या वे केवल उसी मीडिया को पसंद करते हैं जो उनकी स्तुति करता है। तीसरा आयोजक क्या विचारधारा के रूप में उसी राजनीतिक दल से प्रभावित है। चौथा स्वास्थ्य समावेशी सोच क्यों नहीं बढ़ पा रही क्या सबको साथ लेकर चलने वाली विचारधारा जो भारत जोड़ों की बात करती है उसका प्रादुर्भाव काफी प्रयास के बाद भी नहीं हो पा रहा।
कार्यक्रम में पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत अन्य संगठनों के चेहरे भी दिखाई दिए पर बिलासपुर में ऐसा क्या है कि पत्रकारों का वह संगठन जिसे क्लब कहा जाता है अन्य के साथ क्लब होना पसंद नहीं करता. ... यदि पत्रकारिता को मजबूत करना है पत्रकारों को मजबूत करना है, होना है तो क्लब होना सीखना पड़ेगा। कार्यक्रम में बिलासपुर के अब तक के सबसे मिलनसार विधायक लंबे समय उपस्थित रहे बाकी नेता नवोदित है उनके साथ मंच शेयर करना ही विधायक शैलेश पांडे की मिलन सरिता का सबसे बड़ा उदाहरण है और यही लोकतंत्र में मीडिया को आगे ले जाने की सोच है। कार्यक्रम में एनसीपी के प्रदेश प्रवक्ता ने मीडिया बंधुओं के लिए सकारात्मक सोच दिखाई आज हर राजनीतिक दल को मीडिया की स्वतंत्र पत्रकारो की जरूरत है समाप्त करके अपना वर्चस्व बनाना चाहती है। यदि देश में चीनी और रशियन प्रजातंत्र लाना हो तो गोदी मीडिया जो दरबारी से भी ज्यादा दरबारी है और उसके प्राण दाताओं को रोकना ही होगा अन्यथा वे तो और उनकी विचारधारा तिजोरी से लेकर किचन अपने भोजन थाली पूजा का कमरा और शयन कक्ष तक घुस चुकी है। साथ ही यह विचारधारा यह भी बताती है किस रंग को शरीर के किस हिस्से से कब लगाए और कब दूर कर दे, ऐसे में देश जिसे रंग बिरंगी संस्कृतियों वाली बगीचा के रूप में जो लोग देखते हैं उन्हें कष्ट होता है। हताशा को स्थान दिया नहीं जा सकता विविधता को बचाने के लिए पहले से अधिक मेहनत की जरूरत है पर मुकाबले के लिए हिम्मत तो खूब इकट्ठी करनी है पर कमीनापन से दूर रहना ही मंत्र है।


