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कांग्रेस के सब विधायक फिर से जीते मुख्यमंत्री की मंशा को कौन पूरा होने देना नहीं चाहता
- By 24hnbc --
- Saturday, 28 Jan, 2023
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समाचार -
बिलासपुर, 29 जनवरी 2023। अभी 10 दिन ही हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने तखतपुर में आम जनता से संवाद किया और क्षेत्र के भीतर पनप रहे सत्ता विरोधी मानसिकता को थामने की कोशिश की जिसमें वह काफी हद तक सफल भी रहे पर आदत से मजबूर संसदीय सचिव को यह पसंद नहीं आया उन्होंने फिर से आम नागरिकों के बीच विपक्षी राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं के साथ कटु संवाद किया और फिर से आम लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि जनता सत्ता के खिलाफ सोचने लगे। इसी प्रकार पूर्व में संसदीय सचिव का एक कार्यक्रम में सतनामी समाज के सदस्यों से तीखा संवाद हुआ था। और सामाजिक बैठक के बाद इस समुदाय के सदस्यों ने पहले जिला प्रशासन के पास पहुंचकर अपना रुख जाहिर किया फिर उन्हीं लोगों ने रायपुर प्रेस क्लब में संसदीय सचिव ने उनके साथ कैसा व्यवहार किया और समाज ऐसी स्थिति में कितने कठोर निर्णय लेने तक जा सकता है पर अपनी बात रखी. ... इन्हीं सब बातों पर नजर रखते हुए मुख्यमंत्री ने बिलासपुर जिले की इसी सीट को जनसंवाद के लिए चुना यहीं पर उन्होंने यह बयान भी दिया कि वे चाहते हैं कि कांग्रेस के सभी विधायक फिर से जीते जबकि कुछ दिन पूर्व उन्होंने इस आशय के संकेत दिए थे कि जिन विधायकों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं है उनके लिए अंतिम मौका है कि वह अपना प्रदर्शन सुधारें. .... लगता है संसदीय सचिव अपने मुख्यमंत्री की बात कि सब विधायक फिर से जीते को सच सही होने देना नहीं चाहती वे नहीं चाहते कि मुख्यमंत्री उनके विधानसभा क्षेत्र में जनसंवाद करके सत्ता विरोधी मानसिकता को न्यूट्रल करें। तभी तो सतनामी समाज के कटु संवाद के बाद उन्होंने विपक्षी राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं से विवाद लिया। यह विवाद इसलिए और भी ज्यादा जन चर्चा में आया बताया जाता है कि संसदीय सचिव कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष के निर्देश पर रखी जा रही हाथ से हाथ जोड़ो यात्रा कर रहे थे और उसी दौरान विपक्षी राजनीतिक दल के युवा विंग के कार्यकर्ताओं से गर्मा गर्मी हो गई। मामला थाने तक पहुंचा है संसदीय सचिव के पीएसओ ने शिकायत दर्ज कराई है वहीं एवीबीपी के पदाधिकारियों ने भी थाने में लिखित आवेदन दिया है।
विधानसभा क्षेत्र की बारिक जानकारी रखने वाले राजनीतिक जानकारों का कहना है कि वैसे तो यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से बेहद शांत है पर नेताओं के व्यवहार के अनुरूप यहां राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं का व्यवहार भी हो जाता है ऐसे में संसदीय सचिव के राजनीतिक प्रतिद्वंदी का भी व्यवहार उतना ही गर्म मिजाज है जैसा संसदीय सचिव का है। यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि कांग्रेस ने यह सीट बहुत बड़े अंतर से नहीं जीती थी ऐसे में संसदीय सचिव के व्यवहार राजनैतिक मुकाबले को बेहद रोचक बना रहे हैं। जिस तरह का व्यवहार संसदीय सचिव कर रहे हैं समाज को सोचना पड़ेगा कि वे पूरे प्रदेश में कांग्रेसी प्रत्याशियों का समर्थन करें या नहीं. ....।


