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युवा समझ गया है कि 22 साल से उसके साथ वादा फरामोशी हुई ..... बिसवास
- By 24hnbc --
- Monday, 16 Jan, 2023
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समाचार -
बिलासपुर, 17 जनवरी 2023। बिलासपुर विधानसभा के पिछले चुनाव के पूर्व कांग्रेस के एक दिग्गज नेता जो एक से अधिक बार दल बदल कर चुके थे ने एक निजी सर्वे एजेंसी से अपने चुनाव लड़ने और बिलासपुर सीट से चुनाव जीतने की संभावना पर सर्वे करवाया और परिणाम चौंकाने वाला मिला मतदाता सूची के पुनरीक्षण के बाद जो नाम जुड़े उनमें 15 हजार से अधिक ऐसे मतदाता हैं जो 21 से 25 आयु वर्ग के हैं और ये वर्ग आपके नाम को नहीं पहचानता लिहाजा नेता जी ने बिलासपुर से चुनाव ना लड़ने का फैसला किया। इस कहानी को लगभग 4 वर्ष हो चुका है अपने इस राजनीतिक विश्लेषण में इस कहानी का जिक्र इसलिए किया कि 4 साल में देश की राजनीतिक परिस्थिति बहुत कुछ बदली छत्तीसगढ़ की भी बदली और बिलासपुर की भी बदली। बिलासपुर के युवा को क्या हासिल हुआ रोजगार की विशेषकर शहरी रोजगार की क्या स्थिति है। 15 साल छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी का शासन रहा और 4 साल से कांग्रेस का शासन है। दोनों ही राजनीतिक दल के एजेंडे में शहरी युवा के लिए कभी कुछ खास नहीं सोचा गया ज्यादा से ज्यादा यही लफ्जोंलुबाब या जुमला यही कि बेरोजगारी भत्ता दे देंगे। क्या यह पर्याप्त है या शहर के युवा केबल पकौड़ा और ममोज बेचेगा। उसमें भी गुपचुप के अधिकतर खेलें यूपी और मध्य प्रदेश के कब्जे में रहेंगे क्या बिलासपुर में जन्म लेना ही गलत मान लिया जाए। एक समय था जब बिलासपुर का यूथ आंदोलन करता था तो उसे रेलवे का जोन मिल जाता था। पर अब यह उर्जा भी चुक गई है । वादा चाहे किसी ने किया हो वह फरामोशी बन गया जिससे करने वालों को तो मजा मिला पर जिन पर बीती उन्हें क्या. ..... प्राप्त हुआ।
इस बार बिलासपुर के राजनैतिक परिदृश्य में एक नया चेहरा दिखाई देता है लोग सोच सकते हैं कि यह तो बैनर पोस्टर पर टंगने की बात है । और कोई भी कर सकता है पर यह हल्का विश्लेषण है बैनर पोस्टर को ध्यान से पढ़ें इसमें शहर के विकास का वादा है। सरकार बना लेने पर नहीं इससे लगता है कि इस चेहरे ने कुछ करने की ठानी है। वह भी अपने दम पर हम बात कर रहे हैं एनसीपी के प्रदेश प्रवक्ता निलेश बिसवास कि जिस शहर में एक आदद स्लॉटरहाउस नहीं है, बगैर स्वास्थ्य परीक्षण करें सैकड़ों बकरे रोज कट रहे हैं पर निर्वाचित जनप्रतिनिधि केवल वोट बैंक के कारण चुप हैं। ऐसे में एक हाइजीनिक नॉन वेज मार्केट की बात करना हिम्मत का काम है। बगैर सरकार बनाएं शहर को उद्योगों से जोड़ना बताता है कि जिसने अपनी पढ़ाई को औद्योगिक विकास, रोजगार से जोड़ा होगा वही समझेगा कि उद्योग सरकार की कृपा से नहीं खुलते उसके लिए शहर में जनचेतना लानी पड़ती है। हमने एनसीपी के प्रवक्ता से सीधी बात की उनसे पूछा की पोस्टर पर यह सब अच्छा लगता है पर वास्तव में यह कैसे संभव है। उन्होंने कहा इच्छा शक्ति अपने निज स्वार्थ के स्थान पर लोक चेतना और शहर के लिए कुछ ऐसा करना जिससे खुशहाली सबके घर तक जाए ना कि ऐसी योजना जिससे अपना भला हो। उन्होंने उदाहरण के रूप में सीवरेज का नाम लिया कहा कि इस बेकार की योजना से बेहतर होता रोजगार परक उत्पादनात्मक इकाई जिससे बिलासपुर का बाजार बनता उन्होंने कहा सिरगिट्टी क्षेत्र जी से इंडस्ट्रियल क्षेत्र कहा जाता है में शोरूम खोलना यदि उद्योग है तो क्या कहा जा सकता है। एक समय था बिलासपुर में पेपर मिल था, लाख की चूड़ियां बनती थी पर एक-एक कर सब बंद हो गया जबकि यहां एसईसीएल है, रेलवे जोन है, एनटीपीसी है, अपोलो जैसा बड़ा अस्पताल है पर उत्पादन इकाइयां उंगली पर गिनी जाने वाली हैं। वे मानते हैं कि बिलासपुर के युवा मतदाता समझ रहे हैं कि ना तो भाजपा ने 15 साल में भला किया न कांग्रेस 7 साल में..... अब सरकार किसकी बनेगी को छोड़कर नेतृत्व किसे दे उसे जो अपने दम पर विकास करा ले या उन्हें जो सरकार के भरोसे रहते हैं। निलेश ने कहा जब बड़े राजनीतिक दल को छोड़ रायगढ़ की जनता चौकाने वाला निर्णय ले सकती है तो बिलासपुर का मतदाता तो उससे कहीं ज्यादा परिपक्व है।


