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सीईओ साहब की एजेंसियां उलझ कर रह गई है, खिचड़ी दाढ़ी में
- By 24hnbc --
- Saturday, 24 Dec, 2022
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समाचार -
बिलासपुर, 25 दिसंबर 2022। केंद्र सरकार देश की राजनीतिक हालातों को लेकर इन दिनों चिंता में दिखाई दे रही है पर राष्ट्रीय दरबारी मीडिया पर इन दिनों एक संकटमोचक दिखाई न देना अब चर्चा का विषय बन रहा है। और यह चेहरा है राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अजीत डोभाल का सब को फिर से याद दिलाना होगा कि यह चेहरा दिल्ली दंगों के दौरान भी दिखाई दिया था। वर्तमान में भारत चीन सीमा विवाद, कर्नाटक महाराष्ट्र सीमा विवाद, पूर्वोत्तर के विभिन्न राज्यों के बीच सीमा विवाद के बावजूद इनका चेहरा ना दिखाई देना चर्चा तो बनती है।
इन सबके साथ देश के राजनैतिक हालात विशेषकर राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को कैसे डिरेल किया जाए पर इन दिनों विभिन्न तौर तरीके छपते और दिखाई देते रहते हैं। बहुत साल पहले भारत देश की आंतरिक शांति बिगड़ी जब भाजपा के नेता आडवाणी ने रथ यात्रा निकाली पर राहुल की यात्रा तो नफरत के बाजार में प्यार की दुकान खोलने का दावा करने वाली है। ऐसे में यात्रा को डीरेल कैसे किया जाए यह बड़ा प्रश्न बन गया है। पढ़ने वाले सोच सकते हैं कि हम ऐसा क्यों लिख रहे हैं असल में राज्य सरकार हो या केंद्र सरकार उनके इंटेलिजेंट राजनीतिक दलों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखते हैं पर इन दिनों केंद्र की तमाम एजेंसियां और जहां पर भाजपा पार्टी का शासन वहां की राज्य सरकार की एजेंसियां कांग्रेस की गतिविधियों पर पैनी नजर रखती है यही नहीं वह भारत जोड़ो यात्रा का विस्तृत विश्लेषण और उसके प्रभाव पर भी विस्तृत रिपोर्ट न केवल बना रही है बल्कि यात्रा के प्रभाव पर पत्रकारों को उनके ओपिनियन भी लिए जा रहे हैं।
देश की हर समस्या का जवाब मुफ्त अनाज से नहीं दिया जा सकता अब तो नागरिक पूछते हैं सरकारी अनाज की लाइन में किसकी नीतियों ने पहुंचाया। राहुल गांधी की यात्रा में महंगाई को कस्बों कस्बों में चर्चा का विषय बना दिया है बेरोजगारों से इस यात्रा में जबरदस्त इंटरेक्शन हुआ है इन दिनों बेरोजगारी अपने सर्वाधिक ऊंचे स्तर पर है। 8% का यह डंक जातिवाद को तोड़ने वाला है यात्रा में एनजीओस के माध्यम से देश के 12 बड़े किसान संगठन जुड़े हैं और किसान संगठनों ने ना केवल किसानों के साथ बल्कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के साथ तार से तार जोड़ लिया है ऐसे में भाजपा अर्बन, हिंदू वोटर के भरोसे कैसे बढ़ सकती है। भारत पर जोड़ो यात्रा का द्वितीय चरण जनवरी के प्रथम सप्ताह से शुरू होगा और उत्तर प्रदेश, पंजाब और जम्मू होते हुए कश्मीर में खत्म होगा। केंद्र सरकार की चिंता दूसरे दौर की यात्रा भी नहीं है असल में कांग्रेस ने तीसरे दौर का समीकरण भी डाल दिया है जिसमें गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, असम और छत्तीसगढ़ शामिल है इसमें से 3 राज्य के साथ असम बेहद महत्वपूर्ण है। पूर्वोत्तर में तो चुनाव का बिगुल बज चुका है केंद्र के नेता हमेशा से चाहते थे कि राहुल गांधी संसद में बोलते रहे जनसभाओं में बोलते रहें और वह भाजपा के व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के सॉफ्ट टारगेट बनते रहे पर यात्रा के मध्य राहुल गांधी ने ऐसे समय में जनता का सामना किया जब नागरिकों को नेताओं के चेहरों से चिढ़ हो गई है। उन्होंने जुमलो की कहानी झेली है, अपने बचत खाते में 1500000 का झूठ देखा है, अच्छे दिन के स्थान पर ऑक्सीजन की कमी भोगी है और बदले में केवल मन की बात सुनी है ऐसे में कोई नेता सड़क पर चलने का जोखिम उठा ले तो वह पार्टी नेता से हटकर जन नेता बन जाता है। केंद्र की बहुत सी एजेंसियां इस सड़क छाप जननायक की सफेद टी-शर्ट बड़ी हुई खिचड़ी दाढ़ी में उलझ कर रह गई है।


