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भूपेश सरकार का रिपोर्ट कार्ड उन्हें करता है फेल

कांग्रेस के 4 साल का हिसाब किया, "आप पार्टी" की ....... उज्जवला कराडे

24hnbc.com
समाचार -
बिलासपुर। विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर सर्वसम्मति से आरक्षण बिल पास करा लेने के बावजूद आज तारीख तक महामहिम राज्यपाल ने उस पर हस्ताक्षर नहीं किए उल्टे जो प्रेस को कहा उससे यह स्पष्ट हो गया कि बिल पर हस्ताक्षर नहीं होने वाले। सरकार इस मामले को एक तरफ रख कर अपने निर्वाचन की चौथी वर्षगांठ मना रही है। आप पार्टी की नेता उज्वाला कराडे ने भूपेश सरकार के 4 साल पर अपनी बेबाक राय रखी उन्होंने एक के बाद एक हर योजना को और सफल बताते हुए कहा कि, न्याय, प्रगति, समता, समृद्धि 4 प्रत्यय और 4 साल मानो 2001 के बाद छत्तीसगढ़ से यह चारों प्रत्यय गायब थे। 2001 से ही छत्तीसगढ़ में प्राथमिकताएं हमेशा उल्टी पुल्टी रही तभी तो जनता ने रमन सिंह के शासन को पलटते हुए बंपर बहुमत से कांग्रेस की सरकार बनवाई पर जनता को वह सब हासिल नहीं हुआ जो पार्टी की घोषणा पत्र में कहा गया था। हम शहर के गली मोहल्लों में खूब रहे हैं और नागरिकों की बुनियादी समस्याएं सुन रहे हैं जिससे हमको यह पता चलता है कि भूपेश सरकार की गौरव दिवस की योजना भी उनके अन्य योजनाओं के समान केवल कागज पर चमकीली नजर आती है और वास्तव में उनकी इम्पिमेन्टेशंन शून्य है। शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण छत्तीसगढ़ का नागरिक राजस्व विभाग की करतूतों से परेशान हैं, छोटे से भूभाग का क्रय करना यहां पर जिंदगी की सबसे बड़ी भूल बन जाता है और इसका श्रेय भूपेश बघेल को जाता है यह है न्याय, प्रगति ऐसी बेरोजगारी दर भले ही देश में सबसे कम हो पर प्रगति नहीं है क्योंकि शहरी बेरोजगार हो या ग्रामीण उसे काम उपलब्ध नहीं है यहां तक की इन्हीं की सबसे बड़ी योजना जिसे महात्मा गांधी रोजगार गारंटी कानून के नाम पर जानते हैं छत्तीसगढ़ में भूपेश सरकार ने कभी भी जरूरतमंद को 100 दिन का काम नहीं दिया जो कि इस कानून का अनिवार्य पक्ष है सब समता किसकी किसके बीच हां एक बात सत्य है बेरोजगारी के प्लेटफार्म पर बीई और 12वीं पास के बीच यह समता है कि दोनों बेरोजगार हैं। निशक्तजनों का सशक्तिकरण बिलासपुर में एक नहीं कई बार देखा गया जब मोटराराईस ट्राईसाईकिल पर निशक्त व्यक्ति सरकारी दुकान से थोड़ी दूर पर अवैध चखना सेंटर चलाता दिखाई देता है। क्या भूपेश सरकार का आर्थिक सशक्तिकरण यही है। 2218 नई औद्योगिक इकाइयों में से बिलासपुर जिले के सिलपहरी या सिरगिट्टी क्षेत्र में कितनी औद्योगिक इकाई खुली यह बताया जाना चाहिए पर उल्टी दर्जनों छोटी औद्योगिक इकाइयां बंद हो गई। 21457 करोड़ का निवेश में से बिलासपुर जिले में कितना आया कोई कभी नहीं बताता 6 नए जिले, 77 नई तहसील, और 19 में अनुभाग केवल सरकारी कमीशन खोरी के नए केंद्र बन गए। प्रभारी मंत्री जिसे जिस जिले की कमान दी गई है वह अपने जिले की कभी कोई प्रगति रिपोर्ट नहीं बताता इसका कारण साफ है कि कहीं कोई प्रगति हुई ही नहीं है अन्यथा 4 साल बेमिसाल 4 साल का गौरव के पोस्टर पर हर जिले की उपलब्धि उसके प्रभारी मंत्री के फोटो के साथ क्यों नहीं दिखाई जा रही है। बिलासपुर जितना बर्बाद 4 साल पहले था आज उससे अधिक हो गया है नगर निगम सीमा विस्तार का कोई लाभ जनसमान्य को नहीं मिला। बिलासपुर जिले के विधायक, महापौर, और प्रभारी मंत्री अपनी अपनी व्यक्तिगत राजनीति में इतने डूबे रहते हैं कि उन्हें शहर की तरक्की के लिए कुछ करने का सोचने का वक्त ही नहीं मिलता असल बात वे भी जानते हैं कि जिले के लिए निगम के लिए सरकार के पास वित्तीय आवंटन नहीं है तभी तो पीछे ली सामान्य सभा की बैठक में बिलासपुर के प्रथम नागरिक महापौर ने भरे सदन में काम ना होने कारण बजट नहीं है के लिए हाथ जोड़कर क्षमा मांग ली थी और क्षमा किससे मांगी जनता से मांगते तो जनता जवाब देती ऐसे में जनता के पास अब 1 साल है और लोकतंत्र में जनता क्षमा नहीं करती उसे तो घोषणापत्र को लागू होते देखना होता है जिस रिपोर्ट कार्ड पर भूपेश सरकार को पासिंग मार्क भी नहीं मिलते और ऐसी सरकार करदाताओं के टैक्स से प्राप्त रुपयों को विज्ञापन बाजी में खर्च करके गौरव दिवस मनाती है।