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अव्यवस्थित बगैर पार्किंग का शहर, सरकार की नीति ही है उत्तरदाई . ..... बिसवास

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समाचार -
बिलासपुर, 10 दिसंबर 2022। जिसे हम बी ग्रेड सिटी मानते हैं हवाई सेवा से जुड़ा हुआ बताते हैं 130 किलोमीटर रफ्तार वाली वंदे भारत छठवीं ट्रेन मिलने का गर्व करते हैं उसमें सबसे बड़ी परेशानी बेतरतीब यातायात और पार्किंग समस्या हो गई है। इस विषय पर एनसीपी के युवा नेता निलेश बिसवास ने अपने विचार विस्तार से बताएं उन्होंने कहा कि यह सही है की हर जिम्मेदारी सरकार के सिर पर रखकर फुर्सत नहीं हुआ जा सकता। नागरिकों की जागरुकता भी अपनी जगह है पर नीतिगत गलतियां तो सरकार कर रही है जिला प्रशासन कर रहा है और इस शहर का नेतृत्व कर रहा है और इसका उत्तरदाई तो उन्हें होना ही पड़ेगा। राज्य सरकार ने अवैध निर्माण के नियमितीकरण की योजना को दूसरी बार लागू किया। पहली योजना में जो छूट दी गई थी वे पर्याप्त थी पर शहर में सैकड़ों भवन नियमितीकरण से बाहर हो गए इनमें बड़ी संख्या में नर्सिंग होम, होटल और रेस्तरां थे। यह ऐसी श्रेणी के व्यावसायिक स्थल हैं जिन्हें बगैर पार्किंग नियमितीकरण नहीं किया जाना चाहिए पर वह कौन सा दबाव है कि इन्हें भी द्वितीय योजना में वैधता प्रदान कर दी गई। शहर में सत्यम चौक से हरिभूमि चौक में 2001 से 2022 तक लाखों नहीं करोड़ों रुपए सौंदर्य करण में खर्च हुआ है। इस रोड पर फुटपाथ तो है पर वह इस तरह बना दिया गया है की आम आदमी पैदल नहीं चल सकता इस रास्ते पर शहर के सर्वाधिक बीआईपी का मकान है क्या यही एकमात्र कारण है कि इस रोड पर हमेशा पैसा खर्च किया जाता है। 
दूसरा उदाहरण श्रीकांत वर्मा मार्ग का है सरकारी पैसे से योजना के अंतर्गत फुटपाथ बनाया गया किंतु पैदल चलने वालों को नहीं दिया गया। फुटपाथ के बाद पीली पट्टी खींची गई और उसके अंदर गाड़ियों को पार्क करने की व्यवस्था दी गई पर निगम की खस्ता हालत ने यहां भी अपना व्यवसाय देखा पैदल चलने वालों के लिए आरक्षित फुटपाथ पर फूड ट्रक खड़े हो गए जहां वाहन पार तो होने थे वहां आम जनता खड़ी हो गई जो अब फूड ट्रक वालों के ग्राहक हैं। ऐसी स्थिति में सड़क पर यातायात खराब कैसे ना हो जिन्हें फ्री पार्किंग उपलब्ध करानी है वह इतना तगड़ा पैसा मांगते हैं कि आम आदमी उसे देना नहीं चाहता। 
शहर का रण वे हो या रेलवे का प्लेटफार्म ओवर ब्रिज हो या अंडर ब्रिज हमेशा अंडर एस्टीमेट करके बनाए जाते हैं तभी तो मात्र 5 साल में अपनी उपयोगिता खो बैठते हैं उन्होंने कहा कि बिलासपुर देश के उन चुनिंदा शहरों में होगा जहां का बस स्टैंड एक दो बार नहीं तीन से ज्यादा बार स्थान परिवर्तन कर चुका है पर सफलता कोसों दूर है और इसके लिए यहां के स्थानीय नेतृत्व की दूरदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह क्यों न लगाया जाए ।