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छत्तीसगढ़ की धरा पर हुंकार के स्थान पर मेमियाती क्यों सुनाई दी भाजपा नेत्रीयां

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समाचार :-
बिलासपुर, 11 नवंबर 2022। भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बदला, प्रभारी बदला और काफी तैयारी के बाद नकारात्मक विचारों से लैस केंद्रीय मंत्री को छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में भेजा गया। तैयारी भी भरपूर कराई गई छत्तीसगढ़ के संदर्भ में नेत्री को तथ्य भी उपलब्ध कराए गए, स्क्रिप्ट भी जोरदार लिख कर दी गई होगी पर ससुरा आत्मबल कहां से लाएं। कुछ ऐसा ही नजारा बिलासपुर के कलेक्ट्रेट चौक पर तब नजर आ रहा था जब भारतीय जनता पार्टी के नेत्रीयां और नेता अपनी पार्टी के पित्र पुरुष श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा को छोड़, देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु की प्रतिमा के सामने पूरे छत्तीसगढ़ से लाई गई। महिलाओं को संबोधित कर रहे थे यह जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा है जिसे भाजपा के तमाम नेता चौबीसों घंटे मौका ढूंढ ढूंढ कर आलोचना का विषय बनाते हैं। 
शायद दो कारणों से ही मंच के तमाम वक्ताओं का आत्मबल कमजोर पड़ रहा था पहला छत्तीसगढ़ में शराबबंदी की मांग रखने वाला का पूरा परिवार देश के पर्यटन राज गोवा में बार का संचालन करता है। बार भी छोटा मोटा नहीं हमेशा चर्चा में रहने वाला दूसरा नेहरू जी के सामने कितनी बार तथ्य हीन आरोप लगाएं आत्मबल चूक जाता है। भाजपा नेताओं की परेशानी आज तो पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन का धैर्य भी टूटा जा रहा था उन्हें हमेशा मर्यादित शब्दों का उपयोग करने वाला नेता माना जाता है पर आज ऐसा नहीं था उन्होंने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सीबीआई का चार्जशीटेड जमानत पर छूटा हुआ सीएम कहा, सीएम के विधि विधाई ज्ञान पर भी कटाक्ष किया। हुंकार रैली में भाजपा एक नहीं कई गुटों में बटी नजर आई जब पूरे छत्तीसगढ़ में भाजपा की हार की लहर थी ऐसे में बिलासपुर जिले ने ही पार्टी की लाज बचाने वाला काम किया पर भाजपा के नेता इसका मोल नहीं समझते। पटेल मैदान से नेहरू चौक तक निर्वाचित विधायकों पर पूर्व विधायक के पोस्टर भारी पड़ते दिखाई दिए मानो हुंकार रैली के रचयिता पूर्व विधायक ही हो. ....। 
छत्तीसगढ़ से एक सांसद केंद्र में राज्यमंत्री भी है पर किसी भी होल्डिंग में उनकी फोटो इतनी भी बड़ी नहीं थी कि पहचाना जा सके ..... क्या यह छत्तीसगढ़ के निर्वाचित जनप्रतिनिधि का उचित सम्मान है