बुरी तरह लोकसभा चुनाव हारे हुए अब विधानसभा में पार्टी के लिए खोदेंगे गड्ढा
मस्तूरी में कांग्रेस की टिकट के लिए लखनऊ परिक्रमा, क्या जरूरी है
- By 24hnbc --
- Sunday, 06 Nov, 2022
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समाचार :-
बिलासपुर, 6 नवंबर 2022। एसीसी की जनसुनवाई स्थगित कराने का श्रेय लेकर मस्तूरी के अप्रवासी नेता डॉक्टर जायसी विधानसभा टिकट का दावा ठोक रहे हैं। इसके पूर्व में झटका झटकी में जांजगीर लोकसभा से टिकट पा गए थे पर जितनी आसानी से टिकट लाए थे उतनी ही आसानी से हार भी गए। . .... छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के वक्त भी उन्होंने मस्तूरी से टिकट का प्रयास किया था पर सफलता हाथ नहीं लगी थी, उनकी टिकट का समीकरण असल में उस समय के विधायक दिलीप लहरिया के कारण बिगड़ा बताते हैं कि अजीत जोगी ने समझौते के तहत मस्तूरी बहुजन समाज पार्टी को दे दी ऐसे में दिलीप लहरिया के पास कांग्रेस में रहने के अतिरिक्त कोई चारा नहीं था। वैसे डॉक्टर जायसी कांग्रेस के कितने वफादार हैं इस बात का सबूत समय-समय पर मिलता रहता है।
मस्तूरी की राजनीति के जानकार बताते हैं कि इसी साल मल्हार क्षेत्र में मिनीमाता प्रबंधन समिति के एक कार्यक्रम में बिलासपुर जिले के प्रभारी मंत्री जयसिंह अग्रवाल मुख्य अतिथि थे और उसी दिन समीपस्थ एक गांव में दाऊ राम बसपा का एक कार्यक्रम था जिसे सफल बनाने के लिए डॉक्टर साहब का ही काफी सहयोग था।
कहने वाले तो भाजपा के डॉक्टर के संदर्भ में भी यही आरोप लगाते हैं कि मस्तूरी में बसपा का प्रत्याशी डॉक्टर साहब ने ही तय किया था और यही कारण है कि दो डॉक्टरों की जुगलबंदी के चलते कांग्रेस तीसरे नंबर पर आ गई।
लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद डॉक्टर साहब का प्रभाव कांग्रेस मैं उसी परंपरा का निर्वहन करता है जिसमें हारे हुए नेता को आगे बढ़ाया जाता है। लिहाजा बलौदाबाजार के डीएमएफ समिति में डॉक्टर साहब को स्थान मिल गया। मस्तूरी क्षेत्र के पेंड्री डॉक्टर साहब का पैतृक गांव है । बताया जाता है कि डॉक्टर साहब का परिवार यहां 118 मतदाता के रूप में है पर आश्चर्यजनक तथ्य है कि यहां से कांग्रेस को मात्र 9 वोट प्राप्त हुआ।
ऐसे में लोहर्सी की जनसुनवाई स्थगित करने का श्रेय लेने वाले और इनकी दम पर टिकट का ख्वाब देखने वाले अपने पारिवारिक बूथ में कितने मजबूत हैं वैसे इन दिनों मीडिया में लोहर्सी जनसुनवाई पर खूब श्रेय लिया जा रहा है और इसके लिए मेहनत भी खूब की जा रही है। कुछ नहीं था तो बकायदा अखबारों के दफ्तरों में बैठकर जनसुनवाई को फेल करने का श्रेय लूट रहे हैं।
मस्तूरी सीट की टिकट का कनेक्शन लखनऊ से भी जुड़ता है छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के प्रभारी आम कार्यकर्ताओं को नाराज कर के दोस्ती का चुकारा करते पेट्रोल पंप तक जाते हैं। जबकि सड़क किनारे पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ता फूल माला लेकर स्वागत करने खड़े थे, एक तरफ पार्टी के बड़े नेता जिले की हारी हुई सीट पर जीत के लिए विशेष रणनीति बना रहे हैं दूसरी तरफ मस्तूरी में कुछ नेता टिकट लाने के लिए मेहनत के स्थान पर जुगत, बिलासपुर दिल्ली वाया लखनऊ का समीकरण बिठालने में लगे हैं यदि समय रहते इनकी कल ही नहीं उतरी तो चुनाव का परिणाम फिर से जस का तस रहेगा।


