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कांग्रेसी गुटबाजी का रोग लगा भाजपा में, तेजी से फैल रहा है संक्रमण

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समाचार :-
बिलासपुर, 28 अक्टूबर 2022। बिलासपुर सांसद अरुण साव के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी के कार्यकर्ताओं को यह उम्मीद थी कि जल्द ही अध्यक्ष महोदय की कार्यकारिणी बनेगी और बाद में जिला अध्यक्ष की नियुक्ति के साथ नीचे के पद में परिवर्तन होगा। उनकी इस उम्मीद को तब और हवा मिली जब बिलासपुर बिल्हा के विधायक धरमलाल कौशिक को नेता प्रतिपक्ष के पद से हटाया गया तब लोगों को लगा कि अब पार्टी में सब कुछ नए सिरे से होगा, इसी बीच मस्तूरी के विधायक डॉक्टर बांधी को प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी दी गई पर अब जिला अध्यक्षों की एक सूची जारी होने के बाद बिलासपुर में परिवर्तन थम गया नजर आता है । भाजपा के कार्य प्रणाली के जानकार बताते हैं कि बिलासपुर का संगठन बदल पाना आसान नहीं है यहां पर दो दशक तक कद्दावर नेता रहे अमर अग्रवाल की तूती बोलती रही चुनाव में हार जाने के बावजूद संगठन में उनके कद में कोई अंतर नहीं आया है। जब सत्ता थी और बिल्हा विधायक विधानसभा अध्यक्ष बने थे और छत्तीसगढ़ के सीएम डॉक्टर रमन का उन्हें खुला समर्थन था के बावजूद बिलासपुर में तो अमर भैया की ही चली, और अभी भी यही हाल है ऐसे में नए प्रदेश अध्यक्ष भले ही शेष छत्तीसगढ़ में अपनी पसंद की नियुक्ति कर ले पर जहां से वह सांसद हैं वहां पर उन्हें समीकरणों पर अत्यधिक ध्यान देना पड़ रहा है, और इसी कारण कार्यकर्ता अब धैर्य छोड़ रहे हैं। दूसरी तरफ भाजपा के विधायकों की टिकट पर भी संकट है और यह संकट बिल्हा, मस्तूरी, बेलतरा, मुंगेली तक है। ऐसे में पार्टी के भीतर गूटीय खींचतान कांग्रेस से ज्यादा है। डॉक्टर बांधी के राजनीतिक अनुभव और उच्च शिक्षा को देखते हुए उन्हें प्रदेश प्रवक्ता की कमान दी गई पर अब तक का उनका प्रदर्शन संतोषजनक नहीं दिखता इसके पीछे अन्य बड़े नेताओं का छपास रोग भी हैं। ऐसे कई मुद्दे हैं जिन पर बतौर प्रदेश प्रवक्ता डॉक्टर बांधी को लीड करना था पर पार्टी कार्यालय में ही उन्हें स्थान नहीं मिला। कभी पूर्व नेता प्रतिपक्ष तो कभी पूर्व बिलासपुर विधायक और तो और व्यापार प्रकोष्ठ वाले प्रवक्ता भाजपा कार्यालय में प्रेस वार्ता कर के चल देते हैं पर प्रदेश प्रवक्ता बनने के बाद से आज तारीख तक मस्तूरी विधायक ने पत्रकारों से औपचारिक वार्तालाप नहीं की। ऐसे में उनका प्रभावहीन हो ना समझ आ रहा है। वर्तमान विधायकों की टिकट को लेकर भी पार्टी के अंदर ही अंदर चर्चा व्याप्त है लोग कहते हैं जीतने के लिए जब सांसदों की टिकट काटी जा सकती है तो विधायकों की क्या हैसियत, और बिलासपुर के भाजपा विधायकों ने जिस स्तर पर अपने आका बनाए हैं लगभग सब आका ही अब वह प्रभाव नहीं रखते कि किसी का टिकट कंफर्म करा दे, बताया जाता है कि शहर विधानसभा बिलासपुर का जो सर्वे हुआ और प्रत्याशियों की जो सूची प्राथमिकता के आधार पर ऊपर भेजी गई उसमें पूर्व विधायक का नाम चौथे नंबर पर है और 3 विधानसभा क्षेत्र से विधायक बदलने की सिफारिश की गई है। ऐसे में इन दिनों कांग्रेसी नेता भाजपा के बारे में चुटकी लेते नजर आते हैं।