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बीजेपी का चाल, चरित्र और चेहरा हमेशा दोहरा मापदंड रखता है

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समाचार - 
बिलासपुर, 20 अक्टूबर 2022। भारतीय जनता पार्टी की तीन विशेषताएं हैं। मीडिया मैनेजमेंट, चरित्र हनन का मैनेजमेंट, और इवेंट मैनेजमेंट अपने लिए, किस चीज की जांच नहीं करा कर हमेशा रहस्याक बातें करना और उसका लाभ उठाना कोई इनसे सीखे। और आज फिर से एक प्रश्न कि राहुल गांधी जेल भेजे जाएंगे या नहीं...... 
1953 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मृत्यु संदेहास्पद परिस्थितियों में जम्मू कश्मीर में हुई इसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने इस राज्य में को-रिलेशन गवर्नमेंट भी बनाई है केंद्र में भी इनकी सरकार रही परंतु इस रहस्यात्मक मौत पर भाजपा के दो लोह पुरुषों ने आडवाणी और अब अमित शाह ने कभी जांच की ना तो बात की ना बैठा ली। भारतीय जनता पार्टी के दूसरे बड़े नेता दीनदयाल उपाध्याय मृत्यु 1968 स्टेशन का नाम मुगलसराय पर आज तारीख तक कोई जांच नहीं हुई जबकि उत्तर प्रदेश में भाजपा ने एक से अधिक बार सिंगल पार्टी गवर्नमेंट चलाई है और केंद्र में भी सिंगल पार्टी गवर्नमेंट चलाई उसके बावजूद मुगलसराय में हुई इस रहस्यात्मक परिस्थितियों की मौत पर कोई जांच नहीं हुई हां इतना जरूर किया गया कि मुगलसराय का नाम बदल दिया। तीसरा उदाहरण जो बहुत पुराना है ही नहीं गुजरात में भारतीय जनता पार्टी के होम मिनिस्टर हरेंद्र पंड्या की हत्या वास्तविक दोषी आज तक नहीं पकड़े गए गुजरात में भारतीय जनता पार्टी के शासन के शानदार 24 वर्ष हो चुके हैं केंद्र में 8 साल से शासन कर रहे हैं पर लोह पुरुष अपने ही पार्टी के होम मिनिस्टर हरेंद्र पंड्या की हत्या की सही जांच नहीं कराते। ऐसा नहीं है कि भारत देश में जनप्रतिनिधियों की षडयंत्र पूर्वक हत्या और नहीं हुई कांग्रेस पार्टी के 2 बड़े नेता इंदिरा गांधी और राजीव गांधी एक पद पर रहते हुए और दूसरे पद से हटने के बाद मार दिए गए पूरी जांच हुई हत्या के साजिशकर्ता देश में थे या बाहर थे पर जांच पूरी हुई ऐसी जांच ऊपर जिक्र किए गए तीन मामलों की क्यों नहीं हुई। सुभाष चंद्र बोस की कहानी कहानियां भारतीय जनता पार्टी के पटकथा कार वर्षों से सुना रहे हैं आयोग बनवा देते हैं पर अपने ही पार्टी के इन तीन नेताओं की मौत की जांच नहीं करते साफ समझ में आता है कि जहां लाभ होता है उस हिसाब से भाजपा के कर्णधार काम करते हैं चरित्र हत्या में इनका कोई सानी नहीं । पहला उदाहरण नेहरू सरकार में केंद्र के मंत्री जी के मेनन जीप घोटाला, दूसरा नाम इंदिरा गांधी और तीसरा नाम राजीव गांधी गो फोर्स घोटाला। तमाम आरोपों से बाइज्जत बरी होने के बाद भी इनके व्यक्तित्व पर लगा हुआ दाग भाजपा कभी साफ होने नहीं देती पर इनकी पार्टी के घोटालेबाज को वह नायाब वाशिंग मशीन प्राप्त है जो सब कुछ धो डालती है। 
कर्नाटक के भ्रष्टाचारी लिंगप्पा पर अब भारतीय जनता पार्टी के नीति नियंता समिति के सदस्य धवल वस्त्र, धवल धोती फिर से अंगूठे तक पवित्र। केंद्र के अमित शाह अदालत से तड़ीपार किए गए किंतु आज इनसे अधिक पवित्र देश में कोई नहीं, अन्य पार्टियों के नेताओं को दारू खोर, अफीम की, चरित्रहीन बताने के लिए सिद्ध करने के लिए मीडिया में हजारों करोड़ रुपए खर्च कर दिए जाते हैं पर इनके नेता कैमरे पर रुपए और शराब लेकर रुपए को खुदा से कम नहीं का डायलॉग देते हैं पर साफ बच कर निकल जाते हैं केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय प्रमोद महाजन का पुत्र और उसका पी ए पिता की अस्थि कलश ले जाने के पूर्व सरकारी आवास में ड्रग्स लेते हैं एक की मौत हो जाती है और एक बच जाता है पर कोई चर्चा नहीं करता। 
सरकारी खर्च पर अयोध्या में 17 लाख दीए जलाए जाते हैं त्यौहार मनाया जाता है इन दियो के पीछे भ्रष्टाचार का 17 लाख अवसर प्राप्त किया जाता है पर सब कुछ उजला उजला दिखाई देता है तब 17 लाख दियो के पीछे कम होती ऑक्सीजन दिखाई नहीं देती इन मामलों में भाजपा और आप एक जैसे हैं। आप पार्टी भी अपने केंद्रीय एजेंडा लोकपाल, जनलोकपाल कि कहीं कोई चर्चा नहीं करती हिंदू त्यौहार को हर साल पूरा मंत्रिमंडल 1 साथ मनाता है और मीडिया पर टेलीकास्ट करवाता है यदि मंत्री सीबीआई व ई डी की हिरासत में जेल चला जाए तो इस्तीफा नहीं लिया जाता किंतु एक अन्य मंत्री डॉक्टर अंबेडकर के द्वारा दिलाई गई 22 शपथ को दोबारा घोषित करता है तो उसका इस्तीफा ले लिया जाता है इसे वोट की राजनीति नहीं कहे तो क्या कहें। एक तरफ सी ई ओ साहब की दाढ़ी प्रबंधन के साथ बढ़ती है दूसरी ओर भारत जोड़ो यात्रा के नायक की दाढ़ी बेहतरकी बढ़ रही है तो भी मीडिया इस सड़क पर चलने वाले नायक को धक्का देने, गिराने, पटकने का एक भी मौका नहीं छोड़ती। अभी भी उसे लगता है कि आज नहीं तो कल राहुल गांधी का सही स्थान तो जेल है और अब भाजपा को भाजपा के रणनीतिकार इस हिसाब को लगा रहे हैं कि राहुल को जेल भेजना कहीं उल्टा ना पड़ जाए क्योंकि आप राहुल गांधी मीडिया के द्वारा कई हजार करोड़ खर्च होने के बावजूद पप्पू नहीं जन नेता है और उसका जन नेता बनना बीजेपी की हार के समान है।