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बुराई पर अच्छाई की जीत, कैसे दें बधाई रोज तो बढ़ रहा है अंधकार का साम्राज्य

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समाचार :-
बिलासपुर, 5 अक्टूबर 2022। बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व फिट दर फिट ऊंची होती बुराई का प्रतीक को राजनीति के हथियारों से कौन समाप्त कर सका है। आप तो शुभकामनाएं देना भी बाजारवाद का हिस्सा है। बड़े भौगोलिक क्षेत्रफल में कई उदाहरण होंगे जहां पर भय के अंधकार के कारण जीवन की आशा दम तोड़ देती है। पर हम बहुत ही कम क्षेत्रफल के उदाहरणों की बात करेंगे और केवल तीन उदाहरण लेंगे। 
पहला उदाहरण रेट घाट वाले गांव का जहां पर निर्वाचित जनप्रतिनिधि ने रेत तस्कर के सामने भय से आत्महत्या कर ली। पत्र लिखकर गया था पर हुआ कुछ नहीं. ....। 
दूसरा उदाहरण सकरी सरकारी नौकरी करने वाला परिवार का मुखिया और उसका सहारा बनने वाला उसका बेटा, पापा ने सरकारी नौकरी की थी बेटा पढ़ा लिखा इंजीनियर था पर सरकारी नौकरी में नहीं था। सकरी क्षेत्र के 2 लोगों से ब्याज पर पैसा लेने की गलती कर बैठा मूल से दोगुने से अधिक के पैसा वापस किया पर छुटकारा नहीं मिला परिणाम दबाव, भय, शांतिपूर्ण पारिवारिक जीवन जाने की चिंता अंधकार के सामने मृत्यु को गले लगाने की मजबूरी और तीसरा उदाहरण शनिचरी रफ्टा क्षेत्र में सामान्य व्यवसाई सत्ताधारी राजनीतक दल का कार्यकर्ता अंधकार के प्रतीक 2 लोगों के भय, दबाव में प्रदेश के मुख्यमंत्री से परिवार की रक्षा का निवेदन करते हुए अंधकार के प्रतीक 2 लोगों का नाम लिखकर आत्महत्या कर लेता है। ऐसे दर्जनों उदाहरण छत्तीसगढ़ राज्य की राजधानी कही जाने वाले बिलासपुर में मौजूद है। कानून का शासन न्याय की उम्मीद , धार्मिक प्रवचन, आदर्श की बातें, चुने हुए जनप्रतिनिधि, बड़े-बड़े सरकारी अधिकारी आखिर आम शहरी की रक्षा करने में कहां असफल हो रहे हैं यदि यह सिलसिला थमा नहीं तो, कहीं से न्याय के नाम पर बुलडोजर आ जाएगा क्योंकि बुलडोजर घुसने के लिए भूमि तो तैयार हो ही गई है, तब हम उस बुलडोजर की भी वैसी ही आलोचना करेंगे। जैसी आलोचना अभी भय, दबाव और अंधकार की कर रहे हैं। बुलडोजर हो या भय दोनों ही स्वस्थ समाज के लिए अच्छे प्रतीक नहीं है। ऐसे में बुराई पर अच्छाई की जीत पर शुभकामनाएं देने से अच्छा है कि हम फिट दर फिट बढ़ती बुराई को एक दिन गिरा कर आपस में बधाई देकर घर न जाएं बल्कि उसी तरह संगठित होकर बुराई का, अंधकार का, और उसके जीते जागते पुतलों को कानून के दायरे में सबक सिखाएं जो अपने आतंक का साम्राज्य हमारे घरों पर खड़ा कर रहे हैं। निश्चित माने यह काम कोई जनप्रतिनिधि नहीं करेगा क्योंकि इन जनप्रतिनिधियों का तो अंधकार से याराना है। अतः स्वयं एक दूसरे की मदद करने के लिए तैयार रहें।