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चुनाव आयोग चंदे पर पारदर्शिता नहीं एक राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाना चाहता है....... प्रवक्ता एनसीपी
- By 24hnbc --
- Tuesday, 20 Sep, 2022
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समाचार :-
बिलासपुर, 21 सितंबर 2022। देश में पिछले 8 साल से संवैधानिक संस्थाओं में अपने कार्यालय के पते बदले हैं उनमें से सबसे आगे चुनाव आयोग है ऐसा लगता है कि इनके दफ्तर का पता भाजपा के आस पास ही रहता है। अभी तक आचार संहिता चुनाव की तारीख भाषणों पर कार्यवाही जैसे मामलों में चुनाव आयोग सत्ताधारी भाजपा को लाभ पहुंचाता था इस बार चंदे पर जो चिट्ठी लिखी गई है उसका मुख्य उद्देश्य है देश से विपक्ष को खत्म करना है। और यह चिट्ठी गुजरात चुनाव, हिमाचल चुनाव के पहले आ रही है। इस आशय के विचार एनसीपी के प्रदेश प्रवक्ता ने व्यक्त किए उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को चुनाव लड़ने के लिए पैसे की जरूरत होती है चंदे की सीमा तय करना अच्छी बात है पर छोटी राशि वालों को नाम बताना और बड़ी राशि वालों का नाम छुपाना से यह जाहिर होता है कि आयोग किसी एक राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाने की नीयत से नियम बनाना चाहता है। हाल ही में आयोग ने 284 दलों का नियमों का पालन नहीं करने पर रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया। 253 पार्टियों को निष्क्रिय घोषित कर दिया। कर चोरी के आरोप में कई राजनीतिक दलों के ठिकाने पर छापे मारे गए यदि आयोग की सिफारिश को विधि मंत्रालय की अनुमति मिल गई तो ₹2000 से अधिक सभी जनों के बारे में जानकारी देना राजनीतिक दलों के लिए अनिवार्य हो जाएगा। एनसीपी प्रवक्ता नीलेश विश्वास ने कहा कि जहां देश में अन्य राजनीतिक दलों की आमदनी गिर गई वहीं भारतीय जनता पार्टी को सर्वाधिक चंदा मिला। 20-21 में 8 पार्टियों को कुल 1373 करोड़ मिला इसमें से बीजेपी की हिस्सेदारी 54% रही। बीजेपी को 20-19 में 3623 करोड़ का चंदा मिला, 2017 में इलेक्ट्रोल बॉन्ड पर नियम बनने के बाद से देश की केवल एक राजनीतिक दल के पास रुपयों की बरसात हो रही है और छोटे दानदाताओं पर शिकंजा कसा जा रहा है। पहले 20000 तक के दान पर नाम बताना जरूरी नहीं था अब उसे घटाकर दो हजार किया जा रहा है लगता है कि छोटे दानदाताओं पर इस बात के लिए दबाव डाला जा रहा है कि वे एक प्रमुख राजनीतिक दल को छोड़कर किसी अन्य को सहयोग ना करें यह काम स्वस्थ लोकतंत्र के लिए उचित नहीं कहा जा सकता है।


