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नागरिक समझे सीईओ रहा तो देश में एक दलीय शासन व्यवस्था होगी कायम

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर, 14 सितंबर 2022 । 
हालांकि हमारे देश में चुनाव के वक्त राजनीतिक दलों के द्वारा जारी घोषणा पत्र का कोई महत्व नहीं होता फिर भी वर्ष 2022 में आज जब भारतीय जनता पार्टी के शासन को 8 साल से ज्यादा हो गया है तब इस राजनीतिक दल की हरकतें देखकर घोषणा पत्र पर नजर डालनी चाहिए। कहीं भी यह नहीं लिखा है कि सरकार बनाने के बाद हम लोकतंत्र की अनिवार्य शर्त विपक्ष को अपने में शामिल करेंगे। पर सत्ताधारी राजनीतिक दल होने की गंभीरता को समाप्त करते हुए भारतीय जनता पार्टी जहां कहीं भी सत्ता में है विपक्षी राजनीतिक दलों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को अपने दल में शामिल कर रही है। फिर मामला चाहे गोवा का हो, मध्यप्रदेश का हो, पूर्वोत्तर राज्यों का हो, सीमावर्ती राज्यों का हो खुलेआम साम, दाम, दंड, भेद का उपयोग करके निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को भाजपा में शामिल कराया जा रहा है। ऐसा लगता है कि जनता का घोर असम्मान पर भाजपा का नेतृत्व उतारू है। जनता को किया गया वादा 15 लाख देंगे पूरा नहीं किया गया उसी पैसे से हर उस विधायक को खरीदने निकल पढ़ते हैं जिसने लोटस पर चुनाव नहीं जीता. ...... 
बेहतर होता जनप्रतिनिधित्व कानून में बदलाव करते एक दलीय शासन व्यवस्था लागू करते अपने ही राजनीतिक दल से 5 प्रत्याशी चुनाव में उतारते सबसे ज्यादा मत प्राप्त करने वाले को एमपी, दूसरे नंबर वाले को एमएलए, तीसरे नंबर वाले को पार्षद के क्रम से जीता हुआ घोषित कर लेते, पूरी बेशर्मी से यह राजनीतिक दल और इसके नेता देश के नागरिकों को झूठ बोलते हैं और उसे प्रधानमंत्री चुनने का झांसा देते हैं जबकि भारत देश का जनप्रतिनिधित्व कानून प्रधानमंत्री पद का चुनाव नहीं कराता भारत में सांसद चुने जाते हैं पर जिस देश के नागरिक वैदिक युग में आज भी जी रहे हो वहां यह संभव है। जनता ने प्रधानमंत्री चुनने के झांसे में प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का सी ई ओ चुन लिया। जो पूरे देश को लॉस एंड प्रॉफिट के तराजू पर चल रहा है।