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भाजपा हाईकमान अब छ.ग. को लेकर हुआ गंभीर

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर, 10 सितंबर 2022।
 
भारतीय जनता पार्टी का रिमोट सिस्टम जिसे आरएसएस कहा जाता है। 3 दिन छत्तीसगढ़ में रहेगा, इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा राजधानी रायपुर एक दिवसीय प्रवास पर रहे और किसी दिन केंद्रीय कैबिनेट मंत्री पहलाद पटेल विभागीय समीक्षा बैठक के लिए बिलासपुर आए इन तीनों मुद्दों पर एक साथ चर्चा आपेक्षिक है। 
तीनों को अलग-अलग लिखने विश्लेषण करने से यह बात समझ नहीं आएगी की भाजपा हाईकमान के लिए छत्तीसगढ़ कितना महत्व रखता है। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व 2003 की रणनीति से हटकर काम कर रहा है सब भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने भाजपा के छत्तीसगढ़ सांसदों पर भरोसा किया उन्हें केंद्र में मंत्री पद दिया था और छत्तीसगढ़ में जिताने की जिम्मेदारी इस बार ऐसा नहीं है मंत्री मध्य प्रदेश से भेजे जा रहे हैं राजनीति के जानकार इस बात को समझते हैं केंद्रीय मंत्री पहलाद पटेल महाकौशल, जबलपुर, नरसिंहपुर का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनकी कार्यशैली में और कैलाश विजयवर्गीय की कार्यशैली में कोई विशेष अंतर नहीं है तो आने वाले समय में पहलाद पटेल की सक्रियता बिलासपुर सहित छत्तीसगढ़ में बढ़ेगी। इसी बीच राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के भाषण की चर्चा करें कहते हैं उन्होंने कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र बताया। भाजपा के कार्यकर्ताओं को ऐसा जीत का मंत्र पिछली बार अमित शाह अब की बार 80 बार बता कर गए थे परिणाम सब जानते हैं अभी छत्तीसगढ़ में भाजपा की रणनीति को फाइनल टच देना बाकी है यह फाइनल टच गुजरात के परिणाम के बाद होगा। 
अध्यक्ष जेपी नड्डा थे उसी दिन प्रदेश प्रभारी डी पुरंदेश्वरी बदल दी गई अब यह जिम्मेदारी अशोक माथुर को मिली है वह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में नहीं आए प्रभारी को बदलने के पीछे दो कारण, नंबर 1 डी पुरंदेश्वरी हाईकमान के बताए हुए प्रोग्राम को छत्तीसगढ़ में इंस्टॉल नहीं कर पा रही थी, दूसरा वे कांग्रेस से भाजपा आई थी लिहाजा छत्तीसगढ़ में उन्हें काम के साथ कांग्रेस छोड़ने की भी जिम्मेदारी दी गई थी और यह काम शुरू भी नहीं हो पा रहा था वे समझ ही नहीं पा रही थी कि छत्तीसगढ़ में फूल छाप कांग्रेसी सरकार बनवाते हैं और कांग्रेस ने कमल छाप कांग्रेसी को विकल्प खड़ा किया था। जब तक इस सॉफ्टवेयर का एंटीडोट नहीं बनेगा सत्ता परिवर्तन नहीं होगी लगे हाथ दो और चर्चा जामवाल और अशोक माथुर की जोड़ी छत्तीसगढ़ में सफल नहीं होने वाली दोनों पीली आंधी को चलाना चाहते हैं और छत्तीसगढ़ में ओबीसी, एससी दोनों मरवाही लावी से खार खाए बैठे हैं । 
दोनों साधु नहीं है की दोबारा फिर से पीली आंधी के चक्कर में फंसे तो अंत में चुनाव के पूर्व केंद्रीय बलों और उसके पहले सरकार के तीन प्यादे मैदान में आएंगे ।