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हल्ला बोल और घर में खामोश शतरंज

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। बिलासपुर जिला कांग्रेस या शहर कांग्रेस में विज्ञापन, समाचार की शतरंज कोई नई बात नहीं है समाचार की शतरंज पुरानी बात है इसमें केवल चेहरे बदलते हैं वर्तमान में पर्यटन और वजीर प्रवक्ता नए तरीके से शतरंज खेल रहे हैं और ये शतरंज पदयात्रा से लेकर हल्ला बोल, जन्मदिन तक चलती है। पार्टी के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को समय समय पर याद करना कांग्रेस पार्टी की नीति है किंतु जिला कांग्रेस कमेटी शहर कांग्रेस कमेटी अपने ही शहर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को भूल जाती है उन्हें केवल गांधी परिवार के नेता ही याद रहते हैं या फिर ऐसा नेता याद रहता है जिसका नातेदार रिश्तेदार वर्तमान में किसी बड़े पद पर बैठा है। अन्य स्वर्गीय वरिष्ठ नेता को इस कतार में आते ही नहीं हैं उदाहरण के रूप में 4 अगस्त को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मध्य प्रांत के मुख्यमंत्री राघवेंद्र राव का जन्मदिन था। किसी कांग्रेसी नेता को राघवेंद्र राव सभा भवन में लगी प्रतिमा याद नहीं आई किंतु इन्हीं नेताओं को ट्रैफिक थाने के पास लगे शहीद आईपीएस अधिकारी का जन्मदिन याद रहता है शायद इसलिए की उनके पुत्र वर्तमान राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी हैं। बात मूल रूप से हल्ला बोल की थी। संगठन ने निर्देश दिया है कि महंगाई पर जिला स्तर, ब्लॉक स्तर पर धरना प्रदर्शन किया जाना है शो बिलासपुर के देवकीनंदन दीक्षित चौक पर भी हुआ इस फोटो से लगता है कि संगठन मे पदाधिकारियों निर्वाचित जनप्रतिनिधियों निगम मंडल के अध्यक्षों और प्रदेश पदाधिकारियों के बीच बढ़िया तालमेल है किंतु वास्तविक रूप से ऐसा नहीं है दर्जनों बार इसी संगठन ने और उसके पदाधिकारियों ने बिलासपुर के निर्वाचित विधायक के विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणी की और टिप्पणी करने वाले पदाधिकारी कार्यकर्ता के विरुद्ध जांच हुई जांच रिपोर्ट महीनों से प्रदेश संगठन के पास लंबित है और निर्वाचित जनप्रतिनिधि का अपमान भी जारी है फोटो में कैबिनेट दर्जा प्राप्त मंत्री के बाजू में कांग्रेस पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष बैठी दिखाई दे रही हैं उनके बाजू में एमआईसी सदस्य बैठी हैं, किंतु जब समाचार में नाम उल्लेख होते हैं तो चुन चुन कर नाम लिखाने का नहीं काटे जाने का सिलसिला चलता है और यह सिलसिला समाचार से होते हुए बैनर पोस्टर तक जाता है पिछले 2 वर्ष से बिलासपुर में कांग्रेस का एक गुट बैनर पोस्टर के माध्यम से बार-बार रायपुर के प्रथम नागरिक को बिलासपुर में स्थान देता है और अपने प्रथम नागरिक को उसी पोस्टर से गायब कर देता है। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि बिलासपुर के प्रथम नागरिक कांग्रेस के इसी समूह के सदस्य हैं जबकि वही समूह अपने बैनर पोस्टर में रायपुर के प्रथम नागरिक को ज्यादा वजन देता है यदि विधानसभा चुनाव के 13 माह पूर्व भी कांग्रेस संगठन में यही सब कुछ चलता रहा तो चुनाव के समय यह शतरंज और तेज होगी और इस शतरंज में कुछ बड़े मोहरे सफेद से काले खंडों पर भी जा सकते हैं आखिर टिकट लाना और चुनाव जीतना हर निर्वाचित जनप्रतिनिधि की इच्छा होती है।