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दोनों राजनीतिक दल ने समझा जनता को क्यूट

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश के दो प्रमुख राजनीतिक दल सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्ष भाजपा ने संयुक्त रुप से जनता को क्यूट मान लिया है। इसी महीने की 24 तारीख को भाजपा बेरोजगारी के मुद्दे पर सीएम हाउस का घेराव करेगी 18 अगस्त को बड़े कार्यक्रम के पूर्व रिहर्सल बताओ कलेक्ट्रेट घेरा गया महंगाई मुद्दे के लिए कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन दिल्ली में होने वाला है। पूरे छत्तीसगढ़ से ब्लॉक से लेकर जिला पदाधिकारी दिल्ली जाने की तैयारी में हैं यह कार्यक्रम 4 तारीख को है। छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी 15 साल शासन कर चुकी है तब उनके लिए रोजगार कोई मुद्दा ही नहीं था और अभी भी 8 साल से केंद्र में उनका शासन है दो करोड़ रोजगार प्रति वर्ष का वादा स्वप्न दृष्टा पीएम ने दिया था उसके अनुसार 16 करोड़ रोजगार मिल जाना चाहिए मिला होता तो देश के 27 राज्यों के बंटवारे के बीच छत्तीसगढ़ को 50 लाख रोजगार मिल ही जाता ऐसे में यदि राज्य सरकार अपना वादा नहीं भी निभाती तो केंद्र सरकार इतना रोजगार दे देता कि मुख्यमंत्री कोटे से रोजगार ना मिलने का दुख दर्द जनता को नहीं होता। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने वादा नहीं निभाया किंतु उसके पूर्व का वादा तो प्रातः स्मरणीय पीएम का है उन्हें तो शासन करते 8 साल हो चुके तो प्रथम 5 साल का रोजगार तो छत्तीसगढ़ की जनता को मिल ही चुका है और यह 5 साल तो डबल इंजन की सरकार रही है ऐसे में भारतीय जनता पार्टी और उसके अति उत्साही पदाधिकारियों को अपने ही नेता से पूछना चाहिए कि भैया आंदोलन किसके विरुद्ध करना है सीएम हाउस के विरुद्ध या सीएम के विरुद्ध या यह आंदोलन डॉ रमन सिंह के घर के सामने किया जाए अब बात महंगाई के मुद्दे की, महंगाई बड़ा मुद्दा है छोटे से उदाहरण से समझें ₹10 में 2 वर्ष पूर्व सात गुपचुप मिल रही थी उसके बाद एक गुपचुप पुरानी मिलती थी जिसे पूछ कि कहते थे और अब तेल से लेकर आटे तक पर जीएसटी लगने के बाद ₹10 में बमुश्किल 4 गुपचुप प्राप्त हो रही है पुरानी भी नहीं मिल रही है यह हाल है महंगाई का। किंतु यहां एक बात सोचने लायक है कि किसानों के आंदोलन के कारण सरकार ने तीन कृषि कानून वापस ले लिए उनमें से एक कानून जो वापस लिया वह गोदाम में भंडारण को लेकर था। लंबा वक्त बीत गया राज्य के किसी भी जिला प्रशासन ने व्यापारियों के गोदाम का आकाशमिक निरीक्षण नहीं किया। कौन है थोक व्यापारी कितना माल स्टॉप करता है स्टार्ट किए गए माल को दाम बढ़ने पर ही बाजार में निकालता है और खाद्य तेल जो गृहस्ती की पहली जरूरत है पर प्रति पैकेट कैसे 5 से ₹10 तक का खेल खेला जाता है इस पर कभी भी किसी जिला प्रशासन ने कानून का डंडा नहीं चलाया यदि यह छोटी सी राहत भी छत्तीसगढ़ राज्य की सरकार जिसके मुखिया भूपेश बघेल हैं ने दी होती तो उपभोक्ता उन्हें याद करता और महंगाई के खिलाफ उनके आंदोलन को समर्थन भी करता किंतु ऐसा नहीं है। लगता यह है कि जनप्रतिनिधियों ने मतदाता और जनता को क्यूट समझ लिया है।