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एकात्म होकर चुनेंगे नेता या फिर होगी फिर भवन से रोड तक होगा तांडव
- By 24hnbc --
- Tuesday, 16 Aug, 2022
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी का नेता कौन होगा इस के चयन के लिए आज भाजपा विधायक दल की बैठक होने वाली है। 90 विधानसभा सीट वाली छत्तीसगढ़ विधानसभा में भाजपा के 14 विधायक हैं और उसमें से आधा दर्जन विधायक स्वयं को नेता प्रतिपक्ष के रूप में देखना चाहते हैं। दूसरे राजनीतिक दलों पर हंसने वाली भाजपा के लिए यह स्वयं लज्जित होने वाली बात है हालांकि उन्हें लज्जा नहीं आती. .... 6 नाम जो चर्चा में हैं उनमें नारायण चंदेल, बृजमोहन अग्रवाल, अजय चंद्राकर, शिवरतन शर्मा के साथ पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन का नाम भी है। देखें अन्य विधायक नेता प्रतिपक्ष की दौड़ से कैसे बाहर हुए। ननकीराम और पुन्नूलाल मोहले के नाम पर उम्र आड़े आ जाती है। सौरभ सिंह, कृष्णमूर्ति बांधी, विद्या रत्न वसीम, डमरुधर पुजारी जातिगत समीकरणों के कारण इन नामों पर विचार नहीं होता महिला विधायक रंजना साहू, रजनीश सिंह प्रथम बार विधायक बने हैं इसलिए इनके नाम पर भी विचार नहीं किया जाता.... भाजपा का एक घड़ा डॉ रमन सिंह को नेता प्रतिपक्ष बनवाना चाहता है किंतु डॉक्टर रमन स्वयं इसके लिए तैयार नहीं बताया जाते कारण यह है कि वह मुख्यमंत्री रह चुके हैं । विधायकों की बैठक के लिए छत्तीसगढ़ सह प्रभारी मंगलवार को ही रायपुर पहुंच गए थे और आज प्रभारी डी पुरंदेश्वरी भी रायपुर पहुंच गई है। मंगलवार को बिलासपुर में जब संगठन प्रभारी अजय जामवाल मीटिंग ले रहे थे तो मीटिंग के बाद वर्तमान नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक का बयान कल जो होगा देखा जाएगा आप भी यही हो और मैं भी यहीं हूं पता चल जाएगा से उनकी तल्खी बाहर आ गई । छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी दो बार विपक्ष में रही है और नेता प्रतिपक्ष चयन के लिए दोनों मीटिंग हंगामेदार हुई थी। पहले याद करें 14 विधायक वाली भाजपा की पिछली मीटिंग जिसमें धरमलाल कौशिक को नेता प्रतिपक्ष बनाया गया बताते हैं कि बैठक में उपस्थित दो विधायक ही धरमलाल कौशिक के पक्ष में थे एक वे स्वयं और दूसरा डॉक्टर रमन तब बैठक में आए पर्यवेक्षक ने बाहर निकल कर दिल्ली फोन किया अंदर के हालात बताया कहते हैं कि मीटिंग में दिल्ली का संदेश मोबाइल के माध्यम से स्पीकर पर सुनाया गया तब जाकर नेता प्रतिपक्ष का चयन हुआ इसके पहले 2003 में नेता प्रतिपक्ष चयन के लिए जो कोहराम एकात्म परिसर और उसके बाहर सड़क पर हुआ था उसे याद किया जाना चाहिए भारतीय जनता पार्टी जिसे अपने अनुशासन पर गर्व है चूर चूर हो गया था कितनी गाड़ियां किस विधायक के समर्थकों ने जलाई थी याद किया जाना चाहिए बताते हैं कि उस समय के पर्यवेक्षक अपने विधायकों की उर्जा देखकर भयभीत हो गए थे और चुपचाप चल देने में ही भलाई समझे थे। उस समय के पर्यवेक्षक का नाम जिसे जान ना हो 2003 की खबरों को उठा कर देख लें ज्यादा बोलना लिखना उचित नहीं है. .... यहां पर एक बात और कहना जरूरी है कि 14 विधायकों वाली भाजपा की ओर से नेता प्रतिपक्ष का चयन भले ही कर लिया जाए पर उसे सदन में मान्यता देना न देना दोनों विधानसभा अध्यक्ष के विवेक पर निर्भर है। अगले चुनाव के पूर्व संभवत छत्तीसगढ़ विधानसभा के 2 सत्र ही बचते हैं एक बजट सत्र और एक विदाई सत्र ऐसे में नारायण चंदेल को नेता प्रतिपक्ष बनाना अपने आप में दिखावा है क्योंकि वे विधानसभा उपाध्यक्ष हैं जैसे ही नेता प्रतिपक्ष पद पर चयनित होंगे उपाध्यक्ष का पद छोड़ देना पड़ेगा तब क्या कांग्रेस दोबारा विधानसभा उपाध्यक्ष पद पर चुनाव कराएगी । 2003 में बनवारी लाल अग्रवाल विधानसभा उपाध्यक्ष थे तब कांग्रेस ने धर्मजीत सिंह को विधानसभा उपाध्यक्ष बना दिया था। अब आज की 14 विधायकों वाली भाजपा की बैठक में क्या होता है यह बैठक के उपरांत बाद में खुलासा होगा क्योंकि इन दिनों भारतीय जनता पार्टी के नेता पत्रकारों से दूरी बना कर चलते हैं।


