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छत्तीसगढ़ में सत्ता विपक्ष अपने तरीके से बांट रहे मीडिया को

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दल सिर्फ में स्वयं तैयार नहीं हो रहे हैं अपने कार्यकर्ता तैयार नहीं कर रहे हैं साथ में पत्रकारों की गोलबंदी भी की जा रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में सत्ता प्राप्त करने के लिए कांग्रेस ने पत्रकारों को अपनी सलाहकार सूची में डाला था और जीत के बाद तो मुख्यमंत्री ने एक से अधिक पत्रकारों को अपना सलाहकार ही बना डाला इन्हें शासन से नियमानुसार वेतन भी दिया जा रहा है । गाड़ी, घर, स्टॉप की सुविधा अतिरिक्त है। एक कदम आगे बढ़े तो सीएम हाउस कवर करने वाले कौन पत्रकार होंगे ऐसा कहा जाता है कि इस पर भी विशेष नजर रखी जाती है सीधा अर्थ है कुछ विशेष चैनल से किस की ड्यूटी लगाई जाएगी इस पर भी नजर होती है। जैसे-जैसे चुनाव का समय नजदीक आ रहा है विपक्षी पार्टी इसकी काट खोज रही है कहा जाता है उन्होंने सीधे स्टूडियो में सेंधमारी की अर्थात फील्ड की गर्दन सीधे स्टूडियो से पकड़ ली गई। राजधानी स्तर पर यह हाल बड़े चैनल का है। पोर्टल, न्यूज़ साइड देखने वाले पत्रकारों को भी उनकी योग्यता अनुसार मंत्री बंगलों में मान सम्मान की बातें बाहर आती है। कुछ मंत्रियों के बंगले पत्रकारों के लिए मित्रवत है कुछ के नहीं, तीज त्योहारों पर यह व्यवहार दिखाई देता है। विपक्षी राजनीतिक दल ने अब मीडिया के साथ व्यवहार की पुनर समीक्षा की है जिला स्तर पर देखा जा रहा है कि पुराने भाजपाई नेता पुण: संबंध पुनर्जीवित कर रहे हैं कौन किस चैनल से जुड़ा है व्यवसायिक रूप से उसकी मानसिकता पार्टी के अनुकूल है या नहीं इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ऐसे में जो पत्रकार सीधी पत्रकारिता करते हैं उन्हें कांग्रेसी ठप्पा लगा दिया जाता है और कांग्रेस पार्टी ऐसे पत्रकारों को भाजपाई मानती है सीधा अर्थ है केवल पत्रकारिता को राजनैतिक दल आदर्श नहीं मानते यदि पत्रकार जस की तस धर देता है तो उसे दोनों राजनीतिक दल अपने लिए उपयोगी नहीं मानते। बिलासपुर में भारतीय जनता पार्टी के संवाद कार्यालय में इन दिनों कोई नियुक्ति नहीं है जब थी तो जिसे संवाद की जिम्मेदारी दी गई थी वह पूर्व विधायक का खास माना जाता था। कहने का अर्थ भाजपा का संवाद कार्यालय कैडर के अधीन नहीं था। उलट स्थिति कांग्रेस की है कांग्रेस का मीडिया विभाग पर्यटन के अधीन है विधायक का अपना सूचना विभाग है वे अपने तरीके से अपनी गतिविधियों को प्रचारित प्रसारित कर आते हैं। कांग्रेस का हर नेता जिसे खबरों में आना है वह अपना मीडिया विभाग अलग रखता है कहने का आशय कांग्रेस का संगठनात्मक स्तर पर मीडिया विभाग बिलासपुर में तो बेहद कमजोर है या बटा हुआ है। फिलहाल राजनीति के खबरों के लिए नई रणनीति चुनाव की सुविधा अनुसार बन रही है जिस पर हमारी विशेष नजर रहेगी।