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जिले के स्वास्थ्य महकमे में आरटीआई आवेदनों से मची खलबली

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। जिले का स्वास्थ्य महकमा एक तरफ राजनीतिक गुटबाजी से बीमार है दूसरी ओर लगने वाले सूचना के अधिकारों से उसे डिसेंट्री हो जाती है। यहां पर लगने वाला सूचना का अधिकार को मुख्य तौर पर तीन भागों में बांटा जाता है। पहला वे सूचना के प्रकार जो इसी विभाग के अधिकारियों ने बाहर किए हैं और अपने ही लोगों के द्वारा आरटीआई में लगवाए। दूसरा विभाग में व्याप्त राजनीतिक दलों की गुटबाजी के कारण लगने वाली आरटीआई और तीसरा तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करने के लिए मांगी गई जानकारी आवेदन । विभाग में एक पूर्णता प्रशिक्षित सूचना अधिकारी बना लिया गया है जिसे विशेष तौर पर यह प्रशिक्षण दिलाया गया है कि सूचना के अधिकार के तहत जवाब न देने का तरीका क्या हो सकता है। यह सेल ना केवल आवेदन पत्रों को निरस्त करता है बल्कि इसका एक काम यह भी है कि सूचना जिस के संदर्भ में मांगी जा रही है उसे जरूरी हो या ना हो तत्काल बताया जाए कि आवेदन करता फला फला ने आप के संदर्भ में क्या-क्या जानकारी मांगी है अर्थात दलाली का यदि कोई माध्यम बना न हो तो तत्काल बनाया जाए यदि मामला इस स्तर पर नहीं नहीं पड़ता है तो ऐसे लोगों की शरण ली जाती है जो बिलासपुर में किसी राजनीतिक दल से जुड़े है और अपना दबाव रखते हो सूचना के अधिकार के तहत आवेदक की जाति धर्म और दबाव डालने वाले का जाति धर्म भी बहुत महत्वपूर्ण है इस संबंध में तो स्वास्थ्य विभाग के आरटीआई सेल को पूरी महारत हासिल है ऐसे आवेदक जो आदतन इस विभाग में आरटीआई लगाते हैं की पूरी कुंडली इन्हें पता होती है। इस विभाग के विरुद्ध उच्च न्यायालय में लगाई गई एक जनहित याचिका की चर्चा यहां आवश्यक है मामला डॉक्टर मधुलिका ठाकुर से संबंधित था। और पूरा वृत्तीय घोटाला उन्हीं के कार्यकाल में हुआ था। रायपुर के एक पत्रकार और बिलासपुर के एक पत्रकार ने मिलकर समस्त दस्तावेज एकत्र किए और उन्हें जनहित याचिका के माध्यम से उठाया उच्च न्यायालय ने इसे स्वीकार किया और पूरे मामले में विस्तृत आदेश देते हुए कहा कि आवेदक चाहे तो संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज करा सकते हैं। यहीं से इस मामले में नई संकाय पैदा हुई। बताया जाता है कि इस मामले में एक और विभागीय जांच चल रही है और दूसरी ओर सरकंडा थाना कभी-कभी जागकर एक आध नोटिस विभाग को दे देता है किंतु आज तारीख तक इस वित्तीय घोटाले के निराकरण शासकीय पोस्ट को हुई क्षति की पूर्ति दोषियों के विरुद्ध सक्षम न्यायालय में वाद की स्थिति नहीं आई अब विभाग के कुछ अधिकारी के विरुद्ध रोगी कल्याण समिति की राशि में बड़ी वित्तीय अनियमितता के दस्तावेज एकत्र हुए हैं और कहने वालों का तो यह दावा है कि उन्हीं दस्तावेजों के कारण जो स्वोनामधन्य अधिकारियों का तबादला हुआ है और तबादले के बाद भी यह मामला किसी करवट नहीं बैठ रहा है।