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कहां चूका केदार क्यों उदित हुआ अरुण

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। प्रदेश भाजपा में कौन बनेगा अध्यक्ष और कौन होगा सीएम का चेहरा पर एक माह से चर्चा हो रही थी। पत्रकारों ने दर्जनों बार विभिन्न नेताओं के सामने इस प्रश्न को रखा पर सीधा जवाब कभी नहीं आया सीएम के चेहरे पर जवाब दिया गया पीएम का चेहरा कभी बोला गया सामूहिक नेतृत्व कभी बोला गया हम तो चुनाव चिन्ह पर लड़ते हैं और अपनी नीतियों से जीते हैं। इसी बीच बिलासपुर में यह चर्चा जोरों पर थी कि इस बार विधानसभा बिलासपुर से सांसद का टिकट पक्का है। जिसे भविष्य का सीएम भी बताया जा रहा था वह अचानक प्रदेश अध्यक्ष बन गया। जिस दिन अरुण साव के प्रदेश अध्यक्ष बनने का नियुक्ति पत्र जारी हुआ उसके 2 दिन पूर्व केदार कश्यप का प्रदेश अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा था ऐसा दावा ना केवल न्यूज़ पोर्टल ओं ने किया कुछ दैनिक अखबार भी सुर में सुर मिला रहे थे पर दावा दावा ही निकला और हाईकमान के पिटारे से सांसद अरुण शाह का नाम निकला. .... अंदाज़ या पत्रकारिता धरी रह गई नाम घोषित होने के बाद पार्टी में श्रेय लेने की होड़ मची, अलग-अलग लोगों के अलग-अलग दावे कोई कह रहा है ओबीसी पर दांव खेला कोई कह रहा पीली आंधी का कमाल है कोई कह रहा बिलासपुर के पूर्व कद्दावर नेता भैया की चली है। अब अरुण साव भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं लिहाजा बिलासपुर की टिकट फिर से ओपन है। 
राजनीति के कथित पीएचडी कहते हैं भैया ने इन्हें सांसद का ना केवल टिकट दिलाया बल्कि जीत में अहम भूमिका निभाई सो इस बार चुकारे स्वरूप बिलासपुर विधानसभा प्रत्याशी के नाम पर भैया का टिकट फाइनल है। जबकि केंद्रीय नेतृत्व को चिंता है संपूर्ण छत्तीसगढ़ की और फिर से सरकार बनाने की ऐसे में 90 विधानसभा सीट में से एक एक सीट पर संपूर्ण समीकरण हार जीत की संभावना को देखते हुए टिकट वितरण होगा कहते हैं जो कि भाजपा की परंपरा है कि बगैर आर एस एस आशीर्वाद के किसी का टिकट फाइनल नहीं होने वाला शो तमाम नेता आर एस एस के देवताओं के नाम गिन रहे हैं और उन्हें अपनी प्रातः और संध्या आरती में शामिल कर रहे हैं। जानकारों का दावा है बिलासपुर से इस बार भाजपा प्रत्याशी के नाम पर ऐसा नया चेहरा उतारेगी जो बरसों से पार्टी के लिए विश्वसनीय है और बिलासपुर के मध्यम वर्ग की पसंद है।