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जबलपुर में आर्थोपेडिक भाजपा प्रत्याशी की हार ने बिलासपुर में बदल दिए समीकरण

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर । बिलासपुर जिले की बिलासपुर विधानसभा सीट कांग्रेस की जीती हुई सीट है उसके बावजूद कांग्रेस पार्टी में इस सीट के प्रत्याशियों की कोई कमी नहीं, वर्तमान विधायक शैलेश पांडे के स्थान पर टिकट पाने का ख्वाब कई नेता ना केवल संजोए बैठे हैं बल्कि अभी से दावेदारी भी कर रहे हैं। इसके विपरीत भाजपा में यहां से टिकट की दावेदारी खुलकर कोई नहीं करता कहते हैं हारे हुए प्रत्याशी अमर अग्रवाल अंदर ही अंदर तैयारी शुरू कर चुके हैं और ऐसे में संगठन खेमे के हर पद पर जिस तरह से उनके लोग बैठे हुए हैं अन्य कोई सीधी दावेदारी ठोकने से डर रहा है । यह बात है भारतीय जनता पार्टी की सब जानते हैं भारतीय जनता पार्टी का एक अपीलेट कोर्ट भी है, और इस बार ऐसा माना जा रहा है कि इसी अपीलेट कोर्ट ने स्वत संज्ञान लेते हुए बिलासपुर सीट जीतने की जिम्मेदारी के साथ प्रत्याशी चयन की जिम्मेदारी भी अपने पास रखी है। यही कारण है कि शहर के कई दिग्गज डॉक्टर सामाजिक बैठकों में और अपने प्रभाव क्षेत्रों में प्रत्याशी होने की बात करते हैं। राजनीति में हमेशा नए समीकरण बनते हैं यहां तक की पड़ोसी जिले का तापमान भी दूसरे जिले को प्रभावित कर देता है। ऐसी ही एक घटना बिलासपुर के पड़ोस में जिसे जबलपुर कहते हैं हुई में हुई है जिसके कारण बहुत पैसा कमा चुके दो चिकित्सकों की टिकट ही कट गई इनके नाम पर तो विचार ही नहीं होना है। इसी माह जबलपुर नगर पालिक निगम महापौर पद का सीधे जनता के द्वारा हुआ भाजपा ने यहां पर डॉ जितेंद्र जामदार को अपना प्रत्याशी बनाया था। पार्टी के अपने गणित थे किंतु जनता और चिकित्सा व्यवसाय से जुड़े हुए लोग ही यह कहते नहीं थक रहे थे कि डॉक्टर साहब सद्दे से पतंग खो बैठे 5 - 10 हजार नहीं हार हुई 45000 वोटों से अपनी तो अपनी मुख्यमंत्री की भी इज्जत लूटवादी, पता चला कोविड-19 ले में जिन चिकित्सकों ने नागरिकों को जोक के समान चूसा उसके बाद जनता के मन में ऐसे चिकित्सकों के प्रति अपार गुस्सा, घृणा बसी है जब मौका मिलेगा जहां मिलेगा जो देगा सबक सिखाने आतुर रहेंगे सो यह समीकरण बिलासपुर के दो चिकित्सक एक जो डॉ जितेंद्र जामदार हड्डी रोग विशेषज्ञ के समान हैं और दूसरे जो घर-घर किलकारी गुंजवाते हैं का टिकट पर दावा ठंडे बस्ते में है इतना ही नहीं आंख वाले भैया का दावा भी नीचे रख दिया गया है। यदि इस वर्ग से कोई प्रत्याशी आ गया तो निश्चित माने बिलासपुर में उसे सेवा करते 30 साल से अधिक हो चुका होगा और उसकी फीस ₹100 से अधिक नहीं होगी तभी जनता उस ओर सोचेगी इस तरह धन्ना सेठों के समान चांदी की पायल पर बैठकर जनता से वोट मांगना अभी तो संभव नहीं है भारतीय जनता पार्टी उसी तरह जिस तरह कांग्रेस ने नया चेहरा देकर भैया को निपटाया की रणनीति पर चल कर यह सीट जीतने का प्रयास करेगी यह भी हो सकता है कि फ्रेश चेहरा महिला वर्ग से हो जाए......।