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भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने दे दिए संकेत, छत्तीसगढ़ में फिर दौड़ेगी आदिवासी एक्सप्रेस

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। राष्ट्रपति पद पर एसटी महिला का चुना जाना भारतीय राजनीति में महज संयोग नहीं है। भारतीय जनता पार्टी ने इसे अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर चला है छत्तीसगढ़ , मध्यप्रदेश झारखंड में एसटी सीट और मतदाता बड़ी संख्या में हैं। याद करें कुछ माह पूर्व बीजेपी अपनी पार्टी के महापुरुषों से ज्यादा बिरसा मुंडा को याद कर रही है। आदिवासी वोट पर ध्यान देने से छत्तीसगढ़ में ओबीसी नेतागिरी के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है। कांग्रेस की राजनीति में बाद की बात है पहले तो भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रतिपक्ष को अपनी सीट मिलती नजर आ रही है बहुत साल तक छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस मिलकर ओबीसी ओबीसी खेल रहे है वे हाईकमान को यह समझाते हैं कि प्रदेश में 47% ओबीसी हैं और उन्होंने आडवाणी प्लस राजनाथ को आदिवासी एक्सप्रेस से बचा कर रखा इसमें ठाकुर और ओबीसी की मिलीभगत थी जब 15 साल प्रदेश में भाजपा की सत्ता थी तो ओबीसी और ठाकुर मुख्यमंत्री ने एसटी को किनारे लगा कर रखा जब ठाकुर साहब की सत्ता गई तो उन्होंने बड़े समझदारी से ओबीसी वर्ग से नेता प्रतिपक्ष चुनवा दिया। 2003 का चुनाव भाजपा को एसटी वोटरों ने जिताया था भाजपा को 2008 के चुनाव में भी एसटी भाजपा के साथ से 2013 में इस वर्ग ने कांग्रेस की मदद की और यही बात 2018 के चुनाव में भी हुई 2018 के चुनाव में बस्तर, सरगुजा का पूरा क्षेत्र कांग्रेस की झोली में गिर गया। भारतीय जनता पार्टी के नीति बनाने वालों ने यूं ही द्रोपति मुर्मू को राष्ट्रपति चुनाव में नहीं उतारा वह संथाल समुदाय से आती है भील और गोंड क बाद संथाल जनजाति आबादी में सबसे ज्यादा है। मिजोरम, नागालैंड, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश में जनसंख्या में इनके हिस्सेदारी 40% तक है। वही मणिपुर, सिक्किम, त्रिपुरा और छत्तीसगढ़ में 30% है मध्यप्रदेश, झारखंड, उड़ीसा में 20% है। पहचान की राजनीति हमारे समाज में कुछ ज्यादा ही स्थान रखती है फिर से याद करिए भारतीय जनता पार्टी पिछले 1 साल से मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के अंदर बिरसा मुंडा की जयंती बड़े जोर शोर से मना रही है। याद रखें मध्यप्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ के चुनाव दूर नहीं है झारखंड को दूर मान भी लें तो चुनाव के पूर्व अगला ऑपरेशन लोटस यही हो सकता है। अब फिर बात करें छत्तीसगढ़ की कुछ दिन पूर्व ही छत्तीसगढ़ की प्रभारी पुरंदेश्वरी ने कहा था हम मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ेंगे लेकिन अब यह वाक्य वर्तमान स्थिति में खरा नहीं उतरता, दिखाया कुछ और जाएगा किया कुछ और जाता है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की क्रॉस वोटिंग से यह समझ आता है। 2023 के अंतिम 3 माह में चुनाव के पूर्व छत्तीसगढ़ के बड़े आदिवासी चेहरे अजीत जोगी के द्वारा बनाई गई छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस जिसने 7% से अधिक वोट अपने पक्ष में किए थे का भाजपा में विलय निश्चित है और अमित जोगी के रूप में एक आदिवासी चेहरा भाजपा अपने साथ जोड़े की इस बात के संकेत राष्ट्रपति चुनाव के प्रचार के दौरान रेणु जोगी और अब राष्ट्रपति मुर्मू की डिनर टेबल पर दिखाई दे गये। उन्होंने जिस सम्मान के साथ रेणु जोगी का नाम लिया संबोधन दिया सीधा समझ आता है कि इतने बड़े परिवार की सदस्य रेणु जोगी को सम्मान ही सबसे बड़ा आशीर्वाद है और राजनीति में दोबारा सक्रिय होने के लिए इस परिवार को ऐसे बड़े हाथ की ही जरूरत थी वैसे भी अजीत जोगी ने कभी भी अपने जीते जी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसी भी कदम की आलोचना नहीं की थी कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ में एक बार फिर से आदिवासी एक्सप्रेस जमकर दौड़ेगी।