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नक्सली हमले शहीद जवान और मौत के मामले में सबसे ऊपर है छत्तीसगढ़
- By 24hnbc --
- Friday, 22 Jul, 2022
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। असल में आज जब सब और देश को 15 वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के रूप में मिलने का जश्न मनाया जा रहा है तब हम यह चर्चा इसलिए कर रहे हैं कि महामहिम जिस क्षेत्र से आती है वह जिला मयूरभंज उड़ीसा वर्ष 2018 तक नक्सल प्रभावित क्षेत्र था वह जिस राज्य की राज्यपाल रही वह भी घोर नक्सल प्रभावित राज्य है ऐसे में उन्होंने निश्चित ही नक्सल समस्या को अपने ही तरीके से देखा होगा समझा होगा बताओ छात्र, बतौर जनप्रतिनिधि मंत्री और बतौर महामहिम राज्यपाल ऐसे में हम यह चर्चा क्यों ना करें कि उनके राष्ट्रपति रहते हुए देश के नक्शे से नक्सल प्रभावित राज्य इस बुराई से हमेशा के लिए दूर हो जाएं काश जिन्हें नक्सलाइट कहा जाता है वे देश की मुख्य धारा में शामिल हो जाएं सरकार के आंकड़े बताते हैं कि 2011 से लेकर 2020 छत्तीसगढ़ में 3722 नक्सली घटनाएं हुई। 736 आम लोगों की जानें गई, 489 जवान शहीद हुए और 656 नक्सली मारे गए यह आंकड़ा दिल दहला देने वाला है। अभी भी छत्तीसगढ़ के सीलेगर में आम नागरिक सुरक्षा बलों के खिलाफ धरने पर है इस प्रदर्शन को 1 साल से ज्यादा हो चुका है। सरकार के मुताबिक छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ में 14 जिले नक्सल प्रभावित हैं सुकमा, बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर, राजनांदगांव , कोंडागांव, बीजापुर, गरियाबंद, कवर्धा मुंगेली, बलरामपुर, धमतरी, महासमुंद
लोकसभा में एक जवाब के मुताबिक 10 साल में छत्तीसगढ़ में 3722 नक्सली हमले हुए 2011 में 465 शहीद जवान 80 2012 नक्सली हमले 370 जवान शहीद हुए 46 इसी तरह 2013-355-44, 2014 -328 -60, 2015- 466- 48, 2016-395-38, 2017- 373- 60, 2018-392- 55, 2019-263 -22, 2020 -315 -36 कुल 3722 और शहीद हुए जवान 489 यह आंकड़े हैरान कर देने वाले हैं क्योंकि छत्तीसगढ़ से ज्यादा नक्सल प्रभावित झारखंड है और यहां 13 जिले नक्सल प्रभावित हैं उसके बावजूद नक्सली हमले छत्तीसगढ़ में ज्यादा हो रहे हैं झारखंड में इसी दौरान 3256 नक्सली हमले हुए हालांकि सरकार इन्हें नक्सली हमले नहीं कहती बल्कि इन्हें वामपंथी उग्रवाद बताती है। 2011 से 2020 के मध्य छत्तीसगढ़ में जितने भी नक्सली हमले हुए उसमें नक्सलियों से ज्यादा आम लोग मारे गए। सुरक्षाबलों ने 656 नक्सलियों को मारा नक्सली घटनाओं में 736 आम लोगों की जानें गई। छत्तीसगढ़ में नक्सली हमले में मारे गए नागरिकों और शहीद जवानों के आंकड़ों को जोड़ दें तो 1225 मौतें हुई हैं। 2017-18 में छत्तीसगढ़ सरकार को 92 करोड रुपए मिला जो 2020-21 में बढ़कर 140 करोड रुपए हो गया इतनी बड़ी धनराशि आखिर जाति कहां है। आज एक तरफ आम आदमी बढ़ती महंगाई और केंद्र सरकार के गब्बर सिंह टैक्स से परेशान हैं तो दूसरी ओर समाज का बड़ा तबका नक्सलवाद से परेशान हैं। क्या हम यह उम्मीद करें कि आदिवासी समाज की प्रतिनिधि के रूप में आज जब महामहिम द्रौपदी मुर्मू भारत की राष्ट्रपति बनेंगी तो उनके एजेंडे में देश से नक्सलवाद का सफाया प्राथमिकता में होगा।


