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गुजरात की कमान क्यों नहीं मिली भूपेश को....
- By 24hnbc --
- Monday, 18 Jul, 2022
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। हाईकमान के लिए छत्तीसगढ़ के नेता कितना महत्व रखते हैं इसका एक उदाहरण फिर से मिला जब हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पर्यवेक्षक बनाया गया। वही गुजरात के लिए टी एस सिंह देव को जिम्मेदारी मिले बस यही से राजनीतिक विश्लेषण में प्रश्ननात्मक चिन्ह लगता है। हिमाचल प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का ग्रह राज्य हैं वहां पर ब्राह्मण 18%, राजपूत 25%, एसटी 5%, ओबीसी 14%, एससी 32% है। सवर्ण का कुल 50% बनता है । 17 सीट एससी के लिए आरक्षित है, 3 एसटी के लिए है मतदाताओं में ओबीसी 14% पर्यवेक्षक मानते हैं कि बेहतर होता कि टी एस सिंह देव को हिमाचल की जिम्मेदारी दी जाती । वहां के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह उनके नातेदारी में भी आते हैं किंतु ऐसा नहीं हुआ उन्हें गुजरात की जिम्मेदारी दी गई .... असल में कांग्रेस हाईकमान का फैसला कहीं ना कहीं जून महीने के अंतिम सप्ताह में आईटी की रेड से जुड़ा है। कोई माने ना माने आंकड़े कुछ भी कहे छापे के पूर्व बैंगलोर में जो बड़ी धनराशि पकड़ी गई उसका संबंध कहीं ना कहीं छत्तीसगढ़ के सत्ता शिर्ष से है। वे जिस तरीके की एरोगेंट राजनीति करते हैं ऐसे में उन्हें गुजरात देना कांग्रेस को नुकसानदायक होता गुजरात कुशल , मृदुभाषी, सुलझा हुआ पर्यवेक्षक ही चला सकता है और यह गुण टी एस सिंह देव में हैं इसी बीच टीएस ने छत्तीसगढ़ में एक 4 पेज की चिट्ठी सीएम साहब को लिखी प्रेस को भी दी पंचायत जैसा बड़ा विभाग छोड़ दिया सीएम आवास में मंत्रियों की बैठक में भी नहीं गए तो गुस्साए 62 एमएलए चिट्ठी लिख रहे हैं टी एस को पार्टी से बर्खास्त करो इन दिनों संगठन पर जिस तरह भूपेश भक्तों का कब्जा है बड़ी बात नहीं है कि बैठके बुला कर बर्खास्तगी के प्रस्ताव पास किए जाने लगे याद रखें भूपेश भक्तों ने अपने ही दिग्गज नेता अजीत जोगी के साथ ऐसा ही व्यवहार किया था।


