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सत्ता संगठन के बीच फिर मतभेद उभरे, जनता को चिढ़ाने वाले निर्णय से बढ़ी अलोकप्रियता

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर । संगठन बडा़ सकता यह झगड़ा कांग्रेस में स्थाई है मुख्यमंत्री चाहे अजीत जोगी हो या भूपेश बघेल यह मामला कहीं ना कहीं से उभरकर आ ही जाता है। साथ में अब इस बात की भी चर्चा जरूरी हो गई है कि सत्ता की कमान संभाले हुए कांग्रेसी नेता बार-बार जनता को चिढ़ाने के लिए जनता के द्वारा नकार दिए गए चेहरों को बड़ा पद और बाद में दर्जा क्यों दे रही है, साथ ही यह प्रश्न फिर से खड़ा हो गया कि प्रदेश कांग्रेस का संगठन उदयपुर में हुए अधिवेशन के निर्णयों को लागू करना तो दूर उनकी अवहेलना करने की हिम्मत क्यों करता है। हम चर्चा कर रहे हैं कल प्रदेश कांग्रेस में हुई बैठक का से डीआरओ बीआरओ विवाद की बैठक में मुख्यमंत्री के साथ साथ संगठन के बड़े पदाधिकारी बैठे थे यहां पर सीएम ने कहा चंद्रशेखर को हटाने से पहले नोटिस देना था। प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा चुनाव पहले कैसे होते थे सबको पता है बैठक में सीएम और प्रदेश अध्यक्ष का मत डीआरओ बीआरओ को लेकर एक नहीं बन पा रहा है बैठक के तत्काल बाद प्रदेश अध्यक्ष दिल्ली रवाना हो गए। कुछ लोगों का कहना है कि पूरा मामला अपने अपने तरीके से समाचार छपवाने से पैदा हो रहा है सच्चाई क्या है कोई नहीं जानता, कुछ माह पूर्व कांग्रेस का सदस्यता अभियान चला जिन लोगों ने मेहनत की सोए हुए संगठन को दोबारा सक्रिय किया और फिर से अपने अपने क्षेत्र में पार्टी को खड़ा किया अब उन्हीं पे हट जाने का दबाव बनाया जा रहा है ऐसी स्थित विधानसभा क्षेत्र या ब्लॉक में अधिक है जहां पर कांग्रेस की हार हुई थी उसके बावजूद हारा हुआ विधायक स्वयं को अधिक बलशाली बताता है और सत्ता पक्ष से नजदीकी रखते हुए संगठन को अपने ठेंग पर रखना चाहता है वहीं पर सोए हुए संगठन की कमान संभालने के बाद महीनों मेहनत और सदस्यता कराने के बाद अपनी मेहनत पर प्रश्न चिन्ह लगता देख नाराजगी स्वाभाविक है। इसी बीच मंडियों में नियुक्तियां भी हुई ईमानदार कार्यकर्ताओं को ऐसा लगता था कि इस बार मेहनत का फल मिलेगा पर नहीं हुआ। उदयपुर शिविर में निर्णय लिया गया था कि एक व्यक्ति एक पद का सिद्धांत रहेगा फिर रायपुर में बैठक हुई जिले भर के पदाधिकारी इकट्ठे हुए निर्णय को लागू करने की बात आई पर जो दिखाई दे रहा है उससे ऐसा लगा कि उदयपुर में लिए निर्णय से उलट निर्णय लेकर प्रदेश पार्टी के पदाधिकारी हाईकमान को सीधे चुनौती दे रहे हैं । उदाहरण के रूप में बिल्हा विधानसभा से बुरी तरह पराजित हुए राजेंद्र शुक्ला को मंडी अध्यक्ष बनाया गया वे प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी भी हैं। छाया विधायक होने का सुख भोग ही रहे थे इस तरह एक व्यक्ति को 3 पद देने से पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच हर्ष होगा या विषाद इसी तरह निगम मंडल में जो नियुक्ति हुई थी उनमें भी कई चेहरे चुनाव हार चुके थे निगम मंडल में पद मिला ठीक है पर कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिल जाने से पार्टी के ईमानदार कार्यकर्ताओं के बीच रोष है। लगता है निष्पक्ष विश्लेषण कांग्रेस के नेतृत्व को पसंद नहीं है।