No icon

24hnbc

मुखिया कितना भी दावा करे आसान नहीं है छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की राह

24hnbc.com
समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। 1 साल से कुछ अधिक समय बाद छत्तीसगढ़ में होने वाला विधानसभा चुनाव सत्ताधारी दल कांग्रेस के लिए आसान नहीं होने वाला..... इसका कारण केवल यह नहीं है कि केंद्र में भाजपा सरकार बैठी है और चुनाव स्टेट भाजपा को नहीं मोदी शाह को लड़ना है। कांग्रेस के लिए कठिनाई से अधिक उनके अपने ही नेता पैदा करने वाले हैं ये वे नेता है जिन्हें जनता समय-समय पर नापसंद कर चुकी है और सरकार बनने के बाद निर्वाचित विधायकों से ज्यादा प्रभावशाली यही नेता है । ऐसे नेता अभी से विपक्षी दलों के संभावित टिकट प्रत्याशियों से ना केवल मेलजोल बढ़ा रहे हैं बल्कि उनसे व्यक्तिगत निवेदन भी कर रहे हैं कि आप पार्टी टिकट तो लाओ जीत के लिए मैं हूं ना नाम तो ज्ञात नहीं पर जिसने भी कहा था सही कहा था कांग्रेस को जनता नहीं कांग्रेसी ही हराते हैं। सूत्र बताते हैं कि उन विधायकों की हालत इस चक्कर में ज्यादा खराब है जो मुख्यमंत्री गुट के नहीं, फिर चाहे वह जिला बिलासपुर हो, रायपुर हो या फिर हो बस्तर छत्तीसगढ़ राज्य में कांग्रेस की गुटबाजी किसी से छिपी नहीं है । अजीत जोगी के कांग्रेस से निकल जाने के बावजूद पार्टी में भूपेश गुट के अलावा भी ना केवल गुट हैं बल्कि गुट के नेता क्षत्रप भी हैं। पार्टी ने अपने वादे के अनुरूप ना केवल निगम मंडल में पद बांट दिए और कुछ को कैबिनेट मंत्री का दर्जा तक दिया अब ऐसे नेता और जोर शोर से निर्वाचित जनप्रतिनिधि की काट खोज रहे हैं। पहला जहां तक हो सके टिकट ही काट दो। दूसरा टिकट मिल जाए तो विरोधी को मदद दो। तीसरा अभी से 14 महीने के भीतर जितना हो सके उपेक्षित और डैमेज करो। यदि किसी तरीके से पूरे राज्य में कांग्रेसी विधायकों की रेकी हो रही हो तो कम से कम कांग्रेसी नेताओं के इशारे पर ही 13 से अधिक विधायक हैं। कुछ मंत्री भी चुनाव हारे हैं बस भाजपा को एक से डेढ़ प्रतिशत तक स्विंग ही खजाना है और भाजपा के रणनीतिकारों ने उस स्विंग के लिए 1-2 नहीं कर जनों मुद्दे प्राथमिकता से तय किए हैं शीघ्र ही राज्य स्तर पर भी उनका प्रभाव दिखाई देने लगेगा।