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संवैधानिक संस्थाओं का गला घोटने वाले भाजपाई दे रहे लोकतंत्र की दुहाई..... एनसीपी प्रदेश प्रवक्ता निलेश बिसवास

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर । भाजपा ने 25 जून को देश भर के पार्टी कार्यालयों में आपातकाल को याद करते हुए स्वयं को लोकतंत्र की प्रहरी बताया, किंतु जहां भी पार्टी के जिस भी नेता ने पत्रकार वार्ताएं की उन्होंने देश में लगी दो और आपातकाल की चर्चा ही नहीं की ये दोनों आपातकाल विदेशी आक्रमण के कारण लगाए गए थे। देश में लगे तीनों आपातकाल संविधान के प्रावधानों के तहत ही लगे थे। एनसीपी प्रदेश प्रवक्ता निलेश बिसवास ने कहा कि यह वही भाजपा है जो इमरजेंसी के दौरान जेल गए मीशा बंदियों की पेंशन के लिए हल्ला करती है, देती है और देश की सुरक्षा के लिए हमेशा तैयार रहने वाले सैनिकों की पेंशन बंद कर दिए हैं। बिलासपुर से सुदूर जर्मनी तक एक ने कहा दूसरे ने माना दोनों ब्रह्मज्ञानी आज देश में चौथी औद्योगिक क्रांति स्टार्टअप के तहत 100 करोड़ की बात कही जाती है, किंतु यह नहीं बताया जाता कि 3 वर्ष में 45 करोड़ युवा शहरों से बेरोजगार होकर गांव चले गए। 1 लाख नई कंपनियां 4 साल में दम तोड़ गई देश का मध्यमवर्ग जिस की बचत की दम पर बजार इठलाते घूमते थे का बैंक अकाउंट खाली पड़ा है । गोल्ड लोन के डिफाल्टरों की सूची रोज लंबी हो रही है। भाजपा कहती है देश के रग रग में लोकतंत्र है तानाशाही को लोकतांत्रिक तरीके से पराजित किया ऐसा 77 में हुआ था कारण संवैधानिक संस्थाएं बर्बाद नहीं की गई थी संविधान जिंदा था। 25 जून को भाजपा कार्यालय 75 की आपातकाल को काला अध्याय बता रहे थे तभी कर्नाटक के मंगलूर जिले में अनंतपदमनाभ मंदिर में एक फल विक्रेता का कार्य आदेश इसलिए खत्म कर दिया गया क्योंकि वह मुसलमान था। प्रवक्ता ने भाजपा के नेताओं से पूछा कि क्या यह भारतीय संविधान के उस मौलिक अधिकार का हनन नहीं है जो जाति, लिंग, धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करने का वादा करता है। समाज को जिस तरह से 80-20 में बांटा जा रहा है उससे लोकतंत्र में चुनाव तो जीता जा सकता है किंतु संविधान का हारना तय है और संविधान हार गया तो देश समाज और वह लोकतंत्र जिसका सपना हमारे पूर्वज देखते थे वह कैसे पूरा होगा । लोकतंत्र की खूबी बहुमत से लेकर अल्पमत तक का समान रोजगार के अवसर जिनके अवसर सामान बटवारा में ही हैं और भाजपा पुरजोर तरीके से इस लोकतंत्र का गला घोट रही है जिसके लिए सत्ता ही सत्य है।